
ग्वालियर में एक अनोखा मंदिर है जो यमराज को समर्पित है। यह सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन यह सच है कि ग्वालियर में लगभग 350 साल पुराना यमराज का एक मंदिर है। यह मंदिर ग्वालियर के बीचों-बीच फूलबाग स्थित मार्कंडेश्वर मंदिर में है, जहां दीपावली से ठीक एक दिन पहले नरक चौदस के मौके पर यमराज की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस अवसर पर यमराज की प्रतिमा का विधिवत अभिषेक किया जाता है, और भक्त उनसे खास मन्नतें मांगते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय में यमराज ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके गण माने जाएंगे। साथ ही शिवजी ने कहा कि जो लोग दीपावली से एक दिन पहले, नरक चौदस पर यमराज की पूजा और अभिषेक करेंगे, उनकी आत्मा को मृत्यु के बाद कम से कम यातनाओं का सामना करना पड़ेगा और स्वर्ग की प्राप्ति होगी। तब से नरक चौदस के दिन यमराज की इस विशेष पूजा का महत्व है।
इस मंदिर के पुजारी मनोज भार्गव बताते हैं कि यमराज को आयु वृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। नरक चौदस का दिन, जिसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है, परंपरागत रूप से इस पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और विधिपूर्वक यमराज की पूजा करते हैं, जिससे उन्हें शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इस दिन ग्वालियर और उसके आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु मंदिर में आकर यमराज की पूजा में भाग लेते हैं।







