
क्या रोमांस की लत एक वास्तविक समस्या है?
हम सभी ने सुना है कि प्यार अद्भुत होता है। यह जीवन को रंग देता है। लेकिन क्या हो अगर प्यार पाने की यही चाहत एक लत, एक एडिक्शन बन जाए? न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में ऐसी ही एक कहानी सामने आई है, जहां एक महिला को ‘रोमांस की लत’ (Romance Addiction) से जूझना पड़ा, और इस लत से उबरने के लिए उसने एक बेहद कठोर फैसला लिया- यौन संबंधों से पूरी तरह दूरी बना लेना।
यह लत क्या है और यह सामान्य चाहत से अलग कैसे है?
आमतौर पर, जब हम किसी रिश्ते में आते हैं, तो हम सुरक्षा, अपनापन और साझा जीवन की तलाश करते हैं। लेकिन रोमांस एडिक्शन में व्यक्ति रिश्ते की गहराई या पार्टनर के साथ वास्तविक जुड़ाव से ज़्यादा, शुरुआती उत्साह, नएपन की भावना और प्यार में पड़ने के ‘हाई’ का आदी हो जाता है।
एक दोस्त की तरह इसे समझिए- यह शराब पीने जैसा नहीं है, बल्कि यह उस शुरुआती झुनझुनी, उस रोमांच की लालसा है जो हर बार नया रिश्ता शुरू होने पर महसूस होता है। जब रिश्ता सामान्य और स्थिर हो जाता है, तो एडिक्ट बोर हो जाता है और अगले ‘रोमांटिक रोमांच’ की तलाश शुरू कर देता है। यह एक भावनात्मक खालीपन को भरने की कोशिश होती है।
लत तोड़ने के लिए सेक्स छोड़ना क्यों ज़रूरी हो गया?
सवाल यह उठता है कि अगर समस्या रोमांस की है, तो यौन संबंध क्यों छोड़ दिए गए? इस महिला के अनुभव के अनुसार, रोमांस एडिक्शन अक्सर शारीरिक अंतरंगता (Physical Intimacy) के साथ गहराई से जुड़ा होता है।
यह पाया गया कि यौन संबंध या उससे जुड़ी अंतरंगता- चाहे वह कैजुअल हो या गंभीर- उस रोमांच और ‘लत’ को बढ़ावा देने का एक त्वरित माध्यम बन जाती है। यह एक तरह का शॉर्टकट है जो भावनाओं को शांत करने या खुद को ‘प्यारा’ महसूस कराने के लिए इस्तेमाल होता है।
इस एडिक्शन से जूझने वाले कई विशेषज्ञ मानते हैं कि लत को तोड़ने के लिए, उस चीज़ को जीवन से हटाना ज़रूरी होता है जो लत के चक्र को चालू रखती है। इसलिए, ‘सेक्स’ या कोई भी तीव्र भावनात्मक-शारीरिक जुड़ाव छोड़ना, महिला के लिए खुद को शांत करने और वास्तविक आत्म-मूल्य (Self-Worth) पर ध्यान केंद्रित करने का एकमात्र रास्ता था।
अभ्यास के मुख्य बिंदु
रोमांस की लत से उबरने के लिए उठाए गए इस कठोर कदम के पीछे मुख्य विचार निम्नलिखित थे:
- ट्रिगर पॉइंट से दूरी: यौन अंतरंगता को तत्काल संतुष्टि का सबसे बड़ा ट्रिगर माना गया, इसलिए उससे दूरी बनाना आवश्यक था।
- भावनाओं का सामना: जब नए रिश्ते का रोमांच नहीं होता, तो व्यक्ति को अपने अकेलेपन, चिंता और भावनात्मक ज़रूरतों का सामना करना पड़ता है।
- वास्तविक प्रेम की खोज: जबरन ‘नो-सेक्स’ नियम से महिला को यह समझने में मदद मिली कि वह वास्तव में रिश्ते में क्या चाहती है- सतही रोमांच या गहरा, स्थिर जुड़ाव।
- आदत तोड़ना: यह कदम पुरानी, अस्वस्थ संबंध बनाने की आदतों को जड़ से तोड़ने का एक प्रयास था।
निष्कर्ष: आत्म-खोज का कठिन सफर
यह कहानी आधुनिक डेटिंग की दुनिया में बढ़ती जटिलताओं को दर्शाती है। जहां हम लगातार बाहर से अनुमोदन और सत्यापन (Validation) चाहते हैं, वहीं कुछ लोग रोमांस को ही अपनी खुशी का एकमात्र स्रोत मान लेते हैं। इस महिला ने एक साहसी कदम उठाया- अपने जीवन के एक बड़े हिस्से को त्याग दिया- ताकि वह अपनी पहचान और अपनी भावनात्मक ज़रूरतों को बिना किसी बाहरी ‘रोमांटिक हाई’ के समझ सके। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी खुद को ठीक करने के लिए सबसे बड़े त्याग की ज़रूरत होती है।








