बस ड्राइवर से राष्ट्रपति भवन तक: निकोलस मादुरो की जीवनशैली का अनसुना सफर
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो- एक ऐसा नाम जो राजनीतिक विवादों, आर्थिक संकटों और सत्ता के बेजोड़ खेल के लिए जाना जाता है। लेकिन मादुरो का सफर सिर्फ राष्ट्रपति की कुर्सी तक सीमित नहीं है। उनका जीवन एक साधारण बस ड्राइवर से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहने वाले शासक तक पहुंचा है। जब दुनिया उनकी सत्ता और उनके देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पर नजर रखती है, तो यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि एक व्यक्ति जिसने आम आदमी का जीवन जिया, उसका निजी और राजनीतिक जीवन किस तरह बदला।
साधारण शुरुआत: बस चालक और मज़दूर नेता
निकोलस मादुरो का शुरुआती जीवन वेनेजुएला के बाकी राजनेताओं की तरह ऐशो-आराम वाला नहीं था। उनके इतिहास का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक परिवहन की सड़कों पर बीता है। 1970 और 80 के दशक में, मादुरो काराकास की सड़कों पर बस चलाते थे। यह काम सिर्फ आजीविका का साधन नहीं बना, बल्कि यहीं से उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ।
- यूनियन लीडर का उदय: बस ड्राइवर रहते हुए उन्होंने मज़दूर संघों (ट्रेड यूनियनों) में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया। वे जल्द ही परिवहन यूनियन के प्रमुख नेता बन गए। यह अनुभव उन्हें संगठन और जनसमर्थन जुटाने की कला सिखा गया।
- शिक्षा: उनकी औपचारिक शिक्षा पर अक्सर विवाद रहा है, लेकिन उनका असली स्कूल सड़कों पर लोगों के बीच की राजनीति थी।
ह्यूगो शावेज का विश्वासपात्र और सत्ता की सीढ़ियाँ
मादुरो के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब वे समाजवादी नेता ह्यूगो शावेज के संपर्क में आए। शावेज को मादुरो में एक वफादार और मेहनती सहयोगी मिला। मादुरो का साधारण, ज़मीनी अंदाज़ शावेज की ‘बोलीवैरियन क्रांति’ की विचारधारा के अनुकूल था।
शावेज के शासनकाल में, मादुरो ने तेज़ी से पदोन्नति पाई:
- विदेश मंत्री (2006-2013): यह पद उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाला बना। इस दौरान उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की बारीकियां सीखीं।
- उपराष्ट्रपति: अपनी बीमारी के अंतिम दिनों में, शावेज ने सार्वजनिक रूप से मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। शावेज का यह विश्वास मादुरो के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी पूंजी साबित हुआ।
राष्ट्रपति काल और जीवनशैली पर सवालिया निशान
2013 में शावेज की मृत्यु के बाद, मादुरो राष्ट्रपति बने। यहीं से उनकी लाइफस्टाइल और उनके देश की आर्थिक स्थिति के बीच का अंतर व्यापक होने लगा। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश है, लेकिन मादुरो के शासन में देश गहरे आर्थिक संकट, महंगाई और गरीबी से जूझ रहा है।
मादुरो की जीवनशैली हमेशा ही जांच के दायरे में रही है, खासकर जब देश के नागरिक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
- सुरक्षा और भव्यता: राष्ट्रपति बनने के बाद, मादुरो की सुरक्षा और उनके यात्रा खर्चों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई। आलोचकों का आरोप है कि उनकी यात्राओं और निजी जीवन पर होने वाला खर्च उस देश के लिए अस्वीकार्य है जहां लाखों लोग भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- विदेशी आरोप: अमेरिकी प्रतिबंधों और विपक्षी नेताओं का दावा है कि मादुरो और उनके करीबी अपनी शक्ति का उपयोग निजी लाभ और लक्जरी जीवनशैली को बनाए रखने के लिए कर रहे हैं, जबकि आम जनता मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी तरस रही है।
- पहनावा और प्रचार: हालांकि मादुरो कभी-कभी शावेज की तरह सैन्य वर्दी या साधारण कपड़ों में दिखते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक दिखावट में अब सत्ता की चकाचौंध स्पष्ट रूप से दिखाई देती है- जो उनके बस ड्राइवर वाले अतीत से बिल्कुल अलग है।
निकोलस मादुरो की कहानी वेनेजुएला की राजनीति के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है- एक मज़दूर नेता जिसने सत्ता के शीर्ष पर पहुंचकर अपनी साधारण छवि को सत्ता की भव्यता से बदल दिया, भले ही इसके लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा हो।






