नीली घास की हवेली का अभिशाप

आरव को हमेशा से अँधेरे से प्यार था। वह ऐसा अँधेरा नहीं था जो भय पैदा करे, बल्कि वह अँधेरा जो रहस्यों को अपने भीतर छिपाता है। लेकिन केंटकी की उस ‘ब्लूग्रॉस हवेली’ (नीली घास की हवेली) का अँधेरा कुछ और ही था-यह शीतलता, निराशा और अतीत की एक गहरी, सड़ी हुई सुगंध लिए हुए था।

हम वहाँ दो अलग-अलग कारणों से गए थे। मैं, आरव-खोजी पत्रकारिता में विश्वास रखने वाला, जो भूतों और प्रेतों को सिर्फ पुरानी कहानियाँ मानता था। और मेरे साथ थी सियारा-मेरी पूर्व-प्रेमिका, और अब मेरी सबसे बड़ी प्रतियोगी। वह एक प्रसिद्ध पैरानॉर्मल शोधकर्ता थी, जिसकी संवेदनशीलता उसके वैज्ञानिक उपकरणों से कहीं अधिक सटीक थी।

“अभी भी लगता है कि यह सब दिमाग का खेल है, आरव?” सियारा ने हवेली के प्रवेश द्वार पर खड़े होकर पूछा। उसकी आवाज़ में चुभन नहीं, बल्कि एक अजीब-सी चुनौती थी। सियारा ने जैतून के रंग का एक लंबा कोट पहना हुआ था, जिसके नीचे काले कपड़े थे। उसके काले बाल केंटकी की सर्द हवा में उड़ रहे थे, और उसकी आँखें-जिनमें हमेशा रहस्य का एक समुद्र लहराता था-सीधी हवेली के टूटे हुए शीशों में झाँक रही थीं।

“जब तक मुझे लाश या खून का दाग नहीं मिलता, मेरे लिए यह सिर्फ एक बेहतरीन एस्टेट है, जिसे किसी ने बुरी तरह बर्बाद कर दिया है,” मैंने जवाब दिया, लेकिन मेरा ध्यान उसके होंठों पर था। उन होंठों पर, जिनका स्पर्श तीन साल पहले हमारी जुदाई के बाद से मेरी सबसे बड़ी अधूरी इच्छा थी।

यह हवेली लेडी विवियन की कहानी के लिए कुख्यात थी। 1920 के दशक में, विवियन ने अपने पति, एक क्रूर उद्योगपति को छोड़कर अपने अस्तबल के लड़के, एलियास, से प्यार किया था। कहा जाता है कि जब विवियन के पति को पता चला, तो उसने दोनों को हवेली के गुप्त तहखाने में बंद कर दिया और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया। आज भी, हवेली के गलियारों में विवियन की चीख़ें गूँजती थीं।

अधूरी वासना और पहली सिहरन

हम पहली रात को हवेली के मुख्य पुस्तकालय में ठहरे। दीवारें नम थीं, और किताबों की पुरानी गंध हवा में मिली हुई थी। सियारा अपने EMF मीटर और डिजिटल रिकॉर्डर सेटअप कर रही थी, जबकि मैं एक पुरानी लॉगबुक खंगाल रहा था।

अचानक, कमरा ठंडा हो गया। तापमान इतनी तेज़ी से गिरा कि मेरी साँसें भाप बनने लगीं।

“कुछ आया है,” सियारा ने फुसफुसाया। उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, हालाँकि ठंड बर्दाश्त से बाहर थी।

पुस्तकालय के सबसे दूर कोने में, जहाँ विवियन के पति की पुरानी तस्वीरें रखी थीं, एक हल्की, सफेद छाया उभरने लगी। यह धुंध नहीं थी; यह एक आकार था-एक औरत का।

सियारा ने पीछे हटना चाहा, लेकिन उसका पैर एक टूटी हुई फर्श की टाइल में फँस गया। वह संतुलन खोकर गिर रही थी।

बिना सोचे, मैं उसकी ओर लपका। मैंने उसे अपने मज़बूत हाथों में थाम लिया, ठीक इससे पहले कि वह फर्श पर गिरे। उसका गर्म, काँपता शरीर मेरे सीने से टकराया।

उस पल, मेरे लिए भूत-प्रेत और रहस्य सब गायब हो गए। सिर्फ सियारा थी। उसका भय मेरी उत्तेजना बन गया, और मेरी सुरक्षा ने उसे क्षण भर के लिए कमजोर बना दिया।

“आरव,” उसने हाँफते हुए मेरा नाम पुकारा। उसकी साँसें मेरे गले पर पड़ रही थीं।

“शांत रहो,” मैंने धीमी, गहरी आवाज़ में कहा। मेरी उँगलियाँ उसकी कमर के किनारे को दबा रही थीं, जैसे उसे यकीन दिला रही हों कि वह सुरक्षित है।

बाहर का सन्नाटा गहरा हो गया था। पुस्तकालय के कोने में मौजूद वह सफेद आकृति स्थिर थी, जैसे वह हमें देख रही हो-या शायद ईर्ष्या कर रही हो।

सियारा ने अपनी आँखें खोलीं। उसमें अब डर नहीं, बल्कि तीन साल पुराना, दबा हुआ आवेग था। उसने धीरे से अपना हाथ उठाकर मेरे गाल को छुआ। उसका स्पर्श बर्फ और आग का मिश्रण था।

“तुम कभी नहीं बदले,” उसने कहा।

“तुमने कभी मुझे मौका नहीं दिया,” मैंने जवाब दिया, और हमारे बीच की दूरी खत्म हो गई।

हमारे होंठ मिले। यह कोई कोमल, मीठा चुंबन नहीं था। यह तीन साल की प्यास थी, जो इस खतरनाक और डरावनी जगह पर एक-दूसरे में पनाह ढूँढ रही थी। यह तीव्र, कच्चा और माँग करने वाला था। मैंने उसके होंठों को चूमते हुए उसे उठाया और उसे पास की एक पुरानी मखमली कुर्सी पर बिठा दिया।

उसके जैतून के कोट को मैंने तेज़ी से खोला। अंदर उसके शरीर की उष्णता मेरे हाथों को जला रही थी। मैंने उसके बालों को पकड़कर अपने चुंबन को और गहरा किया।

अचानक, ऊपर की बालकनी से ज़ोरदार आवाज़ आई, जैसे कोई भारी वस्तु ज़मीन पर गिरी हो।

हम दोनों चौंक गए, लेकिन हमने अपनी आँखें नहीं खोलीं।

“यह चाहती है कि हम रुकें,” सियारा ने काँपते हुए कहा, लेकिन वह और ज़ोर से मेरे कपड़े खींच रही थी।

“शायद यह चाहती है कि हम उसे दिखाएँ कि सच्चा प्यार कैसा होता है,” मैंने फुसफुसाया।

मैंने अपने कपड़े हटाए और खुद को उसके शरीर के सामने नग्न कर दिया। उसके शरीर की बनावट, उसकी कामुकता, वर्षों की मेरी कल्पनाओं से कहीं ज़्यादा थी। उसकी आँखें बंद थीं, और वह अपने हर डर को, अपनी हर इच्छा को उस पल में मेरे हवाले कर रही थी।

जब हमारा मिलन हुआ, वह सिर्फ शारीरिक नहीं था; यह आत्माओं का मिलन था, जो उस हवेली के एकांत और दुख को चुनौती दे रहा था। सियारा की सिहरन, उसकी दबी हुई आहें, कमरे की ठंडी हवा को गर्म कर रही थीं।

उस क्षण, मुझे लगा कि पुस्तकालय के अँधेरे कोने से एक ठंडी हवा का झोंका आया, जैसे विवियन का प्रेत हमें देख रहा हो-या शायद हमें छूने की कोशिश कर रहा हो। सियारा ने मेरी पीठ पर नाखूनों से खरोंचते हुए ज़ोर से साँस ली, जैसे उस अदृश्य उपस्थिति को अपने पास से धकेल रही हो। हमारा प्रेम उस हवेली के सदियों पुराने दुख पर एक शक्तिशाली विजय था।

तहखाने का रहस्य और विवियन की डायरी

अगली सुबह, हम दोनों शांत थे, लेकिन हमारे बीच का तनाव-जो पहले यौन था-अब भावनात्मक हो चुका था। हमने तहखाने की ओर जाने का फैसला किया। विवियन और एलियास को वहीं बंद किया गया था।

तहखाने की सीढ़ियाँ फिसलन भरी थीं। नीचे, हवा स्थिर और मिट्टी जैसी थी। चारों ओर जंग लगी जंजीरें और टूटे हुए लकड़ी के बक्से बिखरे पड़े थे।

सियारा ने कोने में एक अजीब-सी दीवार को देखा, जो बाकी दीवारों से थोड़ी नई लग रही थी।

“यह ईंटें बाद में लगाई गई हैं,” उसने कहा।

हम औज़ारों से दीवार तोड़ने लगे। हर बार जब कोई ईंट गिरती, तो हवेली में ऊपर कहीं ज़ोरदार गड़गड़ाहट होती। जैसे हवेली हमें रोकना चाह रही हो।

अंततः, दीवार खुली। अंदर एक छोटा, तंग कमरा था। वहाँ कोई कंकाल नहीं था, लेकिन एक लोहे का संदूक था।

संदूक में एक पुरानी, चमड़े की डायरी थी-लेडी विवियन की डायरी।

हमने तुरंत डायरी खोल ली। पन्ने पीले पड़ चुके थे, लेकिन लिखावट साफ थी।

आरव और सियारा साथ बैठकर विवियन के शब्दों को पढ़ने लगे:

“18 सितंबर, 1923: हेरोल्ड (मेरे पति) का अत्याचार सहना अब असंभव है। मुझे एलियास में वह शांति मिली है, जो मैंने कभी नहीं सोची थी। उसका स्पर्श इतना कोमल है, उसकी आँखें इतनी ईमानदार हैं… वह मेरा मुक्तिदाता है।”

अगले पन्ने पर लिखा था:

“25 सितंबर, 1923: मैंने हेरोल्ड को जहर देने का निर्णय लिया है। अगर मैं एलियास के साथ नहीं रह सकती, तो मैं किसी के साथ नहीं रह सकती। आज रात, मैं उसे अंतिम बार मीठा पेय पिलाऊँगी। हम कल आज़ाद होंगे।”

हम चौंक गए। कहानी यह थी कि विवियन निर्दोष थी, लेकिन डायरी ने दिखाया कि वह हत्यारा थी।

आगे पढ़ते हुए, कहानी और भयानक हो गई।

“26 सितंबर, 1923: हेरोल्ड मर गया। एलियास जानता है, और वह डरा हुआ है। वह मुझसे उतना प्यार नहीं करता जितना मैंने सोचा था। जब मैंने उसे अपनी आज़ादी के लिए बलिदान देने को कहा, तो उसने कहा कि यह बहुत बड़ा पाप है। मैंने उसे बताया कि हम हमेशा के लिए इस तहखाने में रहेंगे-सिर्फ हम दोनों। मैंने दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया है। न वह बाहर जाएगा, न कोई हमें यहाँ पाएगा।”

सियारा ने डायरी मेरे हाथों से लगभग छीन ली। “इसका मतलब है… विवियन को उसके पति ने बंद नहीं किया था। उसने खुद को और एलियास को बंद किया था!”

“यह पागलपन है!” मैंने कहा।

अंतिम प्रविष्टि दिल दहला देने वाली थी, जो लगभग एक महीने बाद दर्ज की गई थी:

“20 अक्टूबर, 1923: एलियास मर चुका है। उसने तीन दिन पहले दम तोड़ दिया। वह मुझसे नफरत करता हुआ मरा। मैं अकेली हूँ। इस प्यार के लिए मैंने सब कुछ खो दिया। अब मैं सिर्फ इंतज़ार कर रही हूँ-उसके प्रेत का, या अपनी मौत का। इस दुनिया में अब कुछ नहीं बचा, सिवाय अँधेरे और मेरे पागलपन के।”

अतीत की प्रतिध्वनि और भावनात्मक अंतिम दृश्य

विवियन को उसके पति ने नहीं मारा था; उसने अपनी वासना और प्रेम के जुनून में खुद को और अपने प्रेमी को धीरे-धीरे मौत के मुँह में धकेल दिया था। वह एक शिकार नहीं, एक शिकारी थी। और उसकी आत्मा उसी जुनून में फँसी हुई थी।

जैसे ही हमने डायरी बंद की, तहखाने में एक भयानक चीख़ गूँजी। यह विवियन की चीख़ नहीं थी-यह एक आदमी की थी, पीड़ा से भरी हुई।

“यह एलियास है,” सियारा ने फुसफुसाया। “वह फँसा हुआ है। विवियन ने उसे फँसाया, और अब वह हमें फँसाना चाहती है।”

हमारे ऊपर की ओर से धूल और प्लास्टर गिरने लगा। हवेली गुस्से में थी।

हम तहखाने से तेज़ी से भागे। सीढ़ियों पर चढ़ते हुए, मुझे महसूस हुआ कि मेरे पीछे कोई है। एक ठंडी, दृढ़ शक्ति मेरे टखने को पकड़ रही थी।

सियारा मुड़ी। उसकी आँखें खुली थीं, उनमें आतंक था।

“आरव! दरवाज़े तक पहुँचो!”

जैसे ही हम मुख्य हॉल में पहुँचे, हवेली का दरवाज़ा, जो आधा खुला था, ज़ोर से बंद हो गया।

हम फँस चुके थे।

सामने, लेडी विवियन की अस्पष्ट, पारदर्शी आकृति खड़ी थी। वह वैसी ही थी जैसी कल रात पुस्तकालय में थी-सफेद, धुंधली, लेकिन इस बार उसकी आँखों में स्पष्ट ईर्ष्या और उन्माद था।

“तुम दोनों को इस तहखाने में बंद कर देना चाहिए,” विवियन की फुसफुसाहट हवा में गूँजी। “तुम लोग भी प्यार में हो। प्यार तुम्हें मार डालेगा।”

सियारा कांप रही थी। मैंने उसे पीछे खींच लिया और अपने सीने से लगा लिया।

“यह प्यार नहीं है, विवियन,” मैंने दृढ़ता से कहा। मेरी आवाज़ हॉल में गूँजी। “यह जुनून था। तुमने उसे चुना, और फिर तुमने उसे बंद कर दिया। तुम दोनों को आज़ादी चाहिए, मौत नहीं।”

सियारा ने मेरे कान में फुसफुसाया। “वह प्यार से डरती है, आरव। उसे दिखाओ कि हम हार नहीं मानेंगे।”

मैंने सियारा को पकड़ा और उसे कसकर चूम लिया। यह हमारा आखिरी मौका हो सकता था।

हमारा चुंबन लंबा, गहरा, और अब तक का सबसे भावुक था। यह विवियन की उपस्थिति के बीच, मृत्यु के डर के सामने, जीवन का एक स्पष्ट, ज़ोरदार दावा था।

विवियन की आकृति हमारे चारों ओर काँपने लगी। उसका रूप बिगड़ रहा था, जैसे हमारा सच्चा और निडर प्रेम उसकी विकृत वास्तविकता को तोड़ रहा हो।

जब मैंने सियारा से होंठ हटाए, तो विवियन की आकृति अचानक हवा में फट गई। एक गहरी, दर्द भरी चीख़ जो हवा को फाड़ती हुई दूर चली गई।

अगले ही पल, हवेली का मुख्य दरवाज़ा ज़ोरदार आवाज़ के साथ खुल गया। बाहर ताज़ी, सर्द हवा अंदर आई।

हम आज़ाद थे।

हम दोनों हाँफ रहे थे, लेकिन हमने एक-दूसरे को नहीं छोड़ा। हमने डायरी उठाई और हवेली से बाहर निकल आए।

“हमने उसे क्या दिखाया, आरव?” सियारा ने पूछा, उसके गालों पर आँसू और पसीना मिला हुआ था।

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया। “हमने विवियन को दिखाया कि सच्चा प्यार बंधन नहीं होता। हमने उसे दिखाया कि अगर तुम अपने जुनून को आज़ादी नहीं दोगे, तो वह तुम्हें खा जाएगा। और हमने खुद को भी यही दिखाया।”

“तो… अब?” उसने पूछा, उसकी आँखें मेरे भविष्य की तलाश कर रही थीं।

“अब हम यह हवेली पीछे छोड़ देते हैं, और हम अपने डर को भी पीछे छोड़ देते हैं। कोई रहस्य, कोई दूरी नहीं। सिर्फ तुम और मैं,” मैंने कहा।

केंटकी का सूरज उस धुंध भरी सुबह में पहली बार बादलों से झाँका। हवेली पीछे अँधेरे में डूबी हुई थी, लेकिन हम धूप की ओर बढ़ रहे थे, डायरी को हाथ में लिए हुए, जो हमारे नए और निडर प्रेम की गवाह बन चुकी थी।

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