James wan Netflix

क्या आप जानते हैं- सच का दाम क्या होता है?

रात के इस चौथे पहर में- जब स्याही इतनी गाढ़ी हो जाती है कि सूरज की कल्पना भी एक मज़ाक लगती है- मैं अपने पुराने, ज़ंग लगे टाइपराइटर के सामने बैठा हूँ। मैं हमेशा कहता हूँ कि हॉरर कहानी लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं है। यह आत्मा को कुरेदने का, उस चीज़ को बाहर निकालने का काम है जिसे आप सबसे छिपाना चाहते हैं- असली डर।

और अब, हॉरर का मास्टर- जेम्स वान (James Wan)। उसने घोषणा की है- नेटफ्लिक्स पर ‘ट्रू हॉन्टिंग’ (True Haunting) सीरीज़ आ रही है। यह सुनकर मेरी रीढ़ में एक कंपकंपी दौड़ गई। लोग सोचते हैं कि वान अपनी फ़िल्मों के लिए भूत बनाते हैं- लेकिन असल में वह उन भयावह सच्चाइयों को उठाते हैं जो हमारी दुनिया में चुपचाप दम तोड़ चुकी हैं। रुको, मेरा मतलब है- क्या हम तैयार हैं उस ‘सच्चाई’ को देखने के लिए? क्योंकि इस बार जो कहानी सामने आ रही है, वह केवल दरवाज़ों का हिलना या परछाईयों का दिखना नहीं है। यह उससे कहीं ज़्यादा भयानक, ज़्यादा निजी है। यह एक ऐसा निशान है जो पीड़ित परिवार अपनी आत्मा पर हमेशा ढोएगा।

दरअसल, ‘ट्रू हॉन्टिंग’ एक परिवार के उन दावों पर आधारित है जिन्होंने बरसों तक एक ऐसे घर में ज़िंदगी गुज़ारी- जहाँ उन्हें लगा कि वह अकेलें नहीं है।

वो घर और दीवारें जो साँस लेती थीं

कल्पना कीजिए एक घर की- जो बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखता है। लकड़ी का फ़र्श, साधारण से पर्दे, और एक प्यारी सी चिमनी। लेकिन जैसे ही आप दहलीज पार करते हैं, हवा अचानक भारी हो जाती है। यह कोई पुरानी हवेली नहीं है- यह एक साधारण अमेरिकी घर था, लेकिन इसके भीतर जो खौफ़ पल रहा था- उसने वर्षों तक इस परिवार को जीर्ण कर दिया। उन्होंने महसूस किया की कोई चीज़ देख रही है- हर क्षण- हर पल। शायद इसीलिए वान को यह कहानी ‘दुःस्वप्न-जैसा’ (Nightmarish) लगी होगी।

वे बताते हैं कि शुरुआत हमेशा छोटी होती है। जैसे- किसी ने आपका नाम फुसफुसाया। आपने पलटकर देखा- कोई नहीं। या रात के खाने पर रखी चम्मच अपने आप मेज से फिसल गई। आप इसे थकान या कल्पना का खेल मानते हैं- क्योंकि मानव मन इतना कमज़ोर है की वह तुरंत भयानक सच स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन जब ये छोटी घटनाएँ रोज़मर्रा की आदत बन जाती हैं- जब हर रात एक साया आपके कमरे के कोने में ठहर जाता है- तब आप कहाँ भागेंगे?

यह सब कुछ इस घर के नए मालिकों, डेविड और जैनेट के साथ शुरू हुआ। वे एक नई ज़िंदगी शुरू करना चाहते थे- उन्हें क्या पता था कि वह किसी की अधूरी ज़िंदगी में कदम रख रहे हैं। उनका दावा है कि पहले कुछ महीने तो ठीक थे, सिवाय अजीबोगरीब आवाज़ों के जो बेसमेंट से आती थीं। ऐसा लगता था जैसे नीचे कोई धातु घसीट रहा हो, या कोई बहुत भारी चीज़ गिर रही हो। लेकिन जब वे जाँच करने गए- वहाँ सन्नाटा था। सिर्फ सन्नाटा नहीं- बल्कि एक ठंडी हवा का झोंका- जो गर्मी के दिनों में भी कमरे का तापमान जमा देता था।

और फिर एक दिन, डेविड जब काम से वापस आया, तो उसने देखा कि घर की सभी तस्वीरें- जिनमें उनके बच्चों की मुस्कान कैद थी- ज़मीन पर उल्टी पड़ी हैं। नहीं, कोई चोरी नहीं हुई थी। खिड़कियाँ बंद थीं। यह एक संदेश था- एक चेतावनी कि इस घर में आपकी खुशियों को जगह नहीं है।

  • डेविड ने एक बार रात में अपनी पत्नी को उनके बगल में सोते हुए महसूस किया- लेकिन जब उसने हाथ बढ़ाया- तो बिस्तर खाली था। वह अनुभव इतना वास्तविक था कि उसे लगा उसकी पत्नी अब भी बिस्तर की चादरों में दबी है- बस दिखाई नहीं दे रही।
  • बच्चों ने खिड़कियों पर लगातार खरोंच के निशान देखे, जैसे किसी ने बाहर से नाखून मारे हों- जबकि वहाँ बाहर कोई पेड़ या झाड़ी नहीं थी जो इतनी ऊँचाई तक पहुँच सके।
  • एक रात, उनकी सबसे छोटी बेटी ने दावा किया कि उसके कमरे में एक लम्बी, काली आकृति खड़ी थी- जिसके होंठ नहीं थे। वह बस देखती रही। यह शायद सबसे भयावह दावा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है की- परिवार ने यह सब झेला- न की केवल एक दिन या एक हफ़्ते- बल्कि सालों तक। वे घर छोड़ना चाहते थे, लेकिन उस समय आर्थिक तंगी के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए। उनका यह निर्णय- मेरा मतलब है, उनका मजबूरी में लिया गया यह फैसला- ही शायद इस हॉन्टिंग को इतना घातक बना गया। जब आप अपनी ऊर्जा, अपना भय एक जगह पर लगातार उड़ेलते रहते हैं, तो कहते हैं कि वह ‘चीज’ और मज़बूत हो जाती है। उनका डर उसका भोजन बन गया।

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि कई बार, हॉरर सिर्फ़ बाहर से नहीं आता। यह आपके घर की दीवारों में- आपके तकिए के नीचे- आपके बच्चों के खिलौनों में छिप जाता है।

साइकोलॉजिकल अटैक और परछाई का क़ब्ज़ा

जैसे-जैसे समय बीतता गया, घटनाएँ शारीरिक होने लगीं। केवल आवाज़ें या गिरती तस्वीरें नहीं। अब परिवार के सदस्यों को चोटें लगने लगीं। जैनेट, जो शुरू में सबसे ज़्यादा संशयवादी थी, उसकी बांह पर अचानक गहरे, नीले निशान दिखाई देने लगे- जैसे किसी ने उसे कसकर पकड़ा हो। उसे सोते हुए महसूस होता था कि कोई उस पर भारी वज़न डालकर बैठा है- जिसे स्लीप पैरालिसिस का नाम देकर आसानी से ख़ारिज किया जा सकता है- लेकिन यह हर रात हो रहा था- और निशान सुबह भी दिखाई देते थे।

सोचिए- आप अपनी रसोई में हैं- जहाँ आप खाना बनाते हैं, अपने परिवार को पालते हैं- और अचानक एक ठंडी हवा का झोंका आपकी गर्दन को छूता है। जब आप मुड़ते हैं, तो काउंटरटॉप पर रखा चाकू हवा में तैरने लगता है और फिर ज़ोर से फ़र्श पर गिर जाता है। यह मानसिक संतुलन तोड़ने के लिए काफ़ी है। यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे आप न तो देख सकते हैं, न ही छू सकते हैं- आप बस हारते जाते हैं।

मैं हमेशा कहता हूँ कि किसी भी हॉन्टिंग का असली खौफ़- उसका साइकोलॉजिकल अटैक होता है। यह साया आपकी नींद चुराता है, आपकी तर्कशक्ति को कमज़ोर करता है, और धीरे-धीरे आपको यकीन दिलाता है कि आप पागल हो रहे हैं। यह ‘चीज’ घर से बाहर नहीं निकलना चाहती- यह परिवार की आत्मा पर कब्ज़ा करना चाहती थी।

एक दावा तो ख़ासतौर पर दिल दहला देने वाला है। बड़ी बेटी, जो उस समय किशोरावस्था में थी- ने अचानक खुद को बदलना शुरू कर दिया। वह गुस्से में रहने लगी- उसकी आवाज़ बदल गई- और उसने परिवार के सदस्यों को ऐसी बातें कहनी शुरू कर दीं, जो उसके व्यक्तित्व से बिल्कुल विपरीत थीं। परिवार को पूरा यकीन हो गया था कि घर की नकारात्मक ऊर्जा ने या तो उस पर क़ब्ज़ा कर लिया है, या कम से कम उसे गहराई से प्रभावित कर दिया है। यह वही डर है जिसे वान ने ‘कंज्यूरिंग’ सीरीज़ में भी दर्शाया है- जब बुरी आत्माएँ सबसे कमज़ोर पर वार करती हैं- बच्चे पर।

पता है क्या- असल कहानी इससे भी भयावह है क्योंकि यह सब ‘रिकॉर्डेड’ है। मैं मतलब है- ऑडियो टेप्स पर, डायरी एंट्रीज़ में, और उन चश्मदीदों के बयानों में- जो इस परिवार से मिलने गए थे और अजीब अनुभव लेकर लौटे थे। वहाँ कोई कहानी गढ़ी नहीं जा रही। ये लोग आज भी मौजूद हैं। इनका दर्द सच्चा है।

और ये ही वो कच्चा माल है जिसे जेम्स वान जैसे निर्देशक उठाएँगे। जब हॉलीवुड किसी ‘ट्रू स्टोरी’ को छूता है- तो वह अक्सर इसे मसालेदार बना देता है। लेकिन वान ने पहले भी सिद्ध किया है कि वह उस मौलिक डर को पकड़ सकता है जो सच्चाई में मौजूद होता है- उस डर को जो हमें परेशान करता है- क्योंकि हम जानते हैं कि यह हमारे साथ भी हो सकता है।

क्यों सत्य, कल्पना से अधिक भयावह है

फ़िल्मों में, भूत एक निश्चित समय पर आता है और एक निश्चित समय पर चला जाता है। एक क्लाइमेक्स होता है। लेकिन असली ज़िंदगी में, एक ‘ट्रू हॉन्टिंग’ कभी ख़त्म नहीं होती। यह एक धीमी, स्थिर बीमारी की तरह है जो आपकी ज़िंदगी को खा जाती है। आप उस घर से बाहर निकल सकते हैं- लेकिन क्या आप उस साए को अपनी यादों से बाहर निकाल सकते हैं?

यह परिवार, जिसने आख़िरकार उस घर को बेच दिया और वहाँ से चले गए- उन्होंने कई सालों तक इस घटना को दबाए रखा। लेकिन जो लोग उस आतंक से गुज़रे हैं- उनकी आँखें हमेशा अँधेरे को ढूँढती हैं। उन्हें हर रात यह डर होता है की दरवाज़ा अपने आप खुलेगा और वही लम्बी, होंठहीन आकृति उनके सामने खड़ी होगी। यह PTSD है- लेकिन आत्मा का PTSD।

क्या वान हमें दिखाएगा कि उस घर के नीचे क्या था? शायद कोई पुरानी कब्र? या किसी पिछले मालिक का भयानक अंत? अक्सर, हॉन्टिंग की जड़ें उस ज़मीन में गहरी धंसी होती हैं- जहाँ खून बहा हो या कोई अन्याय हुआ हो। और जब तक उस आत्मा को न्याय नहीं मिलता, तब तक वह नए रहने वालों को कष्ट देती रहती है- जैसे उस ज़मीन का किराया मांग रही हो।

मुझे यह सोचना पड़ रहा है- क्या हॉरर दर्शकों के रूप में, हम इस परिवार के दर्द का शोषण नहीं कर रहे हैं? हम उनकी रात की चीखों को ‘मनोरंजन’ का नाम दे रहे हैं। यह भयानक है, नहि?

जेम्स वान जो कुछ भी पेश करने वाले हैं, वह सिर्फ़ एक सीरीज़ नहीं होगी। यह एक दर्पण होगा जिसमें हम देखेंगे कि जब विज्ञान, तर्क और आशा जवाब दे जाते हैं- तो हम इंसान कितने बेबस हो जाते हैं। और मुझे यह भी लगता है, कि जब यह सीरीज नेटफ्लिक्स पर आएगी, तब कई लोग रात को अपनी लाइट जलाकर सोना चालू कर देंगे।

तो, जब आप यह सीरीज़ देखेंगे- अपनी सुरक्षा की चादर ओढ़कर- तो एक पल के लिए रुकिए। सोचिए उन असली लोगों के बारे में- जिनका घर, उनका जीवन- एक दुःस्वप्न बन गया। क्या वह साया सच में मर गया- या वह अभी भी इंतज़ार कर रहा है कि कोई नया दर्शक उसे बुलाए? Wait, let me backtrack. शायद कुछ चीज़ें पर्दे पर दिखाने लायक नहीं होती हैं। लेकिन वान को पता है, उनका काम क्या है। डरावनी चीज़ें बेचनी।

मैं जल्द ही आपसे मिलूंगा- अगर यह रात मुझे सोने दे- और तब तक, अपने दरवाज़े बंद रखना। और हाँ, उस छोटे से खटखटाहट को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करना- जो अभी-अभी मेरे अध्ययन कक्ष के खिड़की पर हुई।

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