दीपावली के समय पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर इन दिनों काफी चर्चा हो रही है। एक ओर कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से उचित मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे सनातन धर्म पर एक हमला या षड्यंत्र समझते हैं। अब इस मुद्दे पर बाबा बागेश्वर भी खुलकर अपनी राय दे चुके हैं। उन्होंने पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और उन लोगों की आलोचना की, जिनके नज़रिए में एक प्रकार का दोहरापन है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने इसे एक षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पटाखों पर बैन की मांग करने वाले लोग बकरीद के दौरान कुर्बानी पर प्रतिबंध की बात क्यों नहीं करते, जबकि उस समय बकरों की कुर्बानी दी जाती है।
कई जगहों पर यह कहकर पटाखों को बैन किया गया है कि इससे प्रदूषण बढ़ता है। बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हर साल दीपावली से पहले यह तर्क दिया जाता है कि पटाखे प्रदूषण बढ़ाते हैं और फिर उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, जबकि अन्य त्योहारों के समय ऐसा नहीं किया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि होली के दौरान पानी की बर्बादी की आलोचना की जाती है, और यह एक प्रयास है कि हिंदू त्योहारों को किसी न किसी प्रकार से रोका जाए। उन्होंने इसे एक षड्यंत्र बताते हुए इसे रोकने की मांग की।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि दिल्ली और अन्य कुछ राज्यों में प्रदूषण के कारण पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 से अधिक हो गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने इसी वजह से पटाखों पर प्रतिबंध की घोषणा की है। इसके अलावा, मिजोरम में भी सरकार ने क्रिसमस और नए साल के दौरान सभी प्रकार की आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। मिजोरम के गृह मंत्री के. सपदांगा ने 28 अक्टूबर को बताया कि सरकार आतिशबाजी के परिवहन और इस कार्य में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। मिजोरम में पहले भी प्रदूषण को रोकने के लिए क्रिसमस और नए साल के मौके पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।








