
डाउ हिल: जहाँ मेरी कलम ने डर लिखना सीखा
क्या आपने कभी महसूस किया है कि हवा की ठंडक आपके कपड़ों को नहीं- आपकी आत्मा को चीर रही है?
यह वो ठंडक नहीं जो पहाड़ों पर सामान्य होती है। यह उस जंगल की साँस थी- डाउ हिल (Dow Hill)- जिसे भारत का सबसे भयानक पहाड़ी जंगल कहा जाता है- जो आपको भीतर से गला देता है। दार्जिलिंग से थोड़ी दूर, कर्सियांग (Kurseong) में यह जगह है- एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही स्थानीय लोगों की आँखें झुक जाती हैं- मानो वे किसी अनकही विपत्ति का आह्वान कर रहे हों। मैं वहाँ गया था- उस सत्य की तलाश में जिसे हम ‘पिशाच’ या ‘प्रेत’ कहकर खारिज कर देते हैं- लेकिन जो वास्तव में- उस स्थान की मिट्टी में गहरे तक समा चुका है। मुझे सच कहूँ तो- पता नहीं था कि यह दौरा मुझे इतना बदल देगा- इसने मेरे डरावनी कहानियों के सारे विचार ही बदल दिए।
दरअसल, कुछ कहानियाँ केवल सुनी नहीं जाती हैं- उन्हें जिया जाता है।
डाउ हिल को ‘मौत का गलियारा’ भी कहते हैं। वहाँ एक रास्ता है- जिसे ‘डेथ रोड’ (Death Road) के नाम से जाना जाता है- जो स्कूल से जंगल की ओर जाता है- उस सड़क पर अनगिनत दुर्घटनाएँ हुई हैं- अनगिनत रहस्यमय मौतें हुई हैं- और हर स्थानीय व्यक्ति कसम खाता है कि वहाँ की ऊर्जा नकारात्मकता से इतनी भरी है कि कोई भी सामान्य आदमी पागल हो सकता है। वहाँ पहुँचते ही मुझे लगा जैसे मेरे ऊपर हज़ारों टन का वज़न आ गया हो- मेरे भीतर का उत्साह अचानक से भय में बदल गया- हालाँकि- मैंने खुद को शांत रखा और अपने रिकॉर्डिंग उपकरण तैयार किए। यह मेरी ज़िद थी- उस ख़ौफ़ का सामना करने की ज़िद जिसकी कहानियाँ मैं बचपन से सुनता आ रहा था।
डेथ रोड का सन्नाटा और सरकटी आत्मा
वहाँ जाने का समय मैंने जानबूझकर दोपहर के बाद का चुना था- जब सूरज ढलना शुरू होता है और जंगल की परछाइयाँ लंबी- और मोटी- हो जाती हैं। सड़क पतली थी- देवदार और ओक के पुराने- सदियों पुराने पेड़ों से घिरी हुई थी- जिनकी शाखाएँ आसमान को ढक लेती थीं- सूरज की रौशनी मुश्किल से ज़मीन तक पहुँच पा रही थी। यहाँ तक कि पक्षियों की आवाज़ें भी शांत थीं- एक अजीब सा- भारी सन्नाटा था- जो कानों में गूँजता था।
मैंने धीरे-धीरे अपनी कार से बाहर कदम रखा- मिट्टी नम थी- और हवा में एक अजीब सी- सड़ी हुई- गंध थी- जैसे कोई चीज़ बहुत लंबे समय से मर रही हो। मेरा ड्राइवर- जो स्थानीय ही था- उसने तुरंत मुझे चेतावनी दी। उसने मुझसे कहा- “बाबूजी- अँधेरा होने से पहले लौट चलिएगा। इस रास्ते पर देर रात कोई नहीं टिकता।” मैं जानता था कि वह अतिशयोक्ति नहीं कर रहा है- उसका चेहरा पीला पड़ चुका था- उसकी आँखों में एक अजीब सा दहशत था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था।
मैंने पूछा- “क्यों? किस चीज़ का इतना डर है?”
उसने बस धीरे से फुसफुसाया- “सर कटी आत्मा- बाबूजी। वो छोटा लड़का। वो इंतज़ार करता है।”
यह डाउ हिल की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक है- सिर कटी आत्मा का दावा। लोग कहते हैं कि इस ‘डेथ रोड’ पर अक्सर एक सिर कटा लड़का घूमता हुआ दिखाई देता है। आप उसे देखते हैं- वह जंगल में चल रहा होता है- लेकिन जब तक आप पलक झपकाते हैं- वह अचानक से पेड़ों के बीच गायब हो जाता है। यह देखना ही इतना भयावह है कि किसी का भी दिमागी संतुलन बिगड़ सकता है। कई स्थानीय लकड़हारे और राहगीर इस दृश्य को देखने के बाद मानसिक रूप से बीमार पड़ गए हैं- कई लोगों ने तो आत्महत्या भी कर ली है क्योंकि वे उस ख़ौफ़ को अपने दिमाग से हटा नहीं पाए। I mean- यह केवल भूत देखने की बात नहीं थी- यह आपकी चेतना को ख़त्म करने वाला अनुभव था।
जैसे ही मैं आगे बढ़ा- मेरी चाल धीमी हो गई- हर कदम भारी लगने लगा। मैं जंगल में क़रीब एक किलोमीटर अंदर चला गया होगा- जहाँ घना कोहरा ज़मीन को चाट रहा था। मुझे लगा जैसे मेरे पीछे कोई चल रहा हो। यह एक स्पष्ट शारीरिक अनुभूति थी- जैसे कोई मेरी गर्दन के ठीक पीछे साँस ले रहा हो- हालांकि- जब मैं तेज़ी से मुड़ा- वहाँ कुछ नहीं था। बस पुराने पेड़ और उनके लटकते हुए काई- और वह गहरा- अनवरत सन्नाटा। मैं kinda समझ सकता था कि लोगों को यहाँ पागलपन क्यों महसूस होता है।
और फिर- मैंने सुना।
वह बहुत हल्की आवाज़ थी- जैसे कोई पत्तों पर रेंग रहा हो। मैंने टॉर्च निकाली और पेड़ों के बीच रौशनी डाली। कुछ नहीं। मैं फिर से चलने लगा- लेकिन इस बार मैं पहले से ज़्यादा अलर्ट था। एक पल के लिए- मुझे झाड़ियों के बीच कुछ हल्का सा हिलता हुआ दिखा- बिल्कुल मानव आकार का- पर बहुत छोटा। मैंने अपनी आँखें गड़ा दीं- लेकिन तुरंत ही वह चीज़ गहरे अँधेरे में विलीन हो गई। Wait- let me backtrack- क्या वह वाकई में कुछ था- या यह बस उस जंगल की ताक़त थी जो मेरे दिमाग से खेल रही थी?
यही डाउ हिल का असली ख़ौफ़ है- यह आपको यह जानने नहीं देता कि आप क्या देख रहे हैं- क्या सुन रहे हैं। यह भ्रम और वास्तविकता की रेखा को मिटा देता है।
विक्टोरिया बॉयज़ हाई स्कूल का अतीत
डेथ रोड से कुछ दूर ही विक्टोरिया बॉयज़ हाई स्कूल है। यह स्कूल सदियों पुराना है- और इसका इतिहास रहस्यमय मौतों और दुखद घटनाओं से भरा हुआ है। माना जाता है कि सर्दियों की छुट्टियों के दौरान जब स्कूल बंद होता है- तब यहाँ पैरानॉर्मल गतिविधि चरम पर होती है। यह उस सिर कटे बच्चे की कहानी से कम भयावह नहीं है- बल्कि ज़्यादा व्यक्तिगत है- क्योंकि यह एक बंद जगह का डर है।
मैं स्कूल के गेट के बाहर रुका रहा- लोहे की जंग लगी हुई जाली थी- और अंदर की इमारत गॉथिक शैली की- बहुत भव्य लेकिन अब उदास लग रही थी।
असल में- स्थानीय लोगों की गवाही है कि उन्हें अक्सर बंद कक्षाओं में- या गलियारों में भागते हुए बच्चों के पदचाप (footsteps) सुनाई देते हैं। कई सुरक्षा गार्डों ने दावा किया है कि उन्होंने रात में स्कूल के अंदर से किसी के रोने की या फुसफुसाने की आवाज़ें सुनी हैं। कल्पना कीजिए- बिल्कुल शांत रात है- आसमान में चाँद भी नहीं है- और आप एक खाली- बंद स्कूल के बाहर खड़े हैं- और अंदर से खेल रहे बच्चों की दबी हुई आवाज़ें आती हैं। आपकी रूह काँप जाएगी।
यह स्कूल अब सिर्फ़ एक इमारत नहीं रहा- यह दुःख का स्मारक बन चुका है- उन आत्माओं का घर जो शायद कभी अपने घर नहीं लौट पाईं- या जिन्हें यहाँ किसी भयानक कारण से रुकना पड़ा।
मैं गेट के पास दीवार के किनारे खड़ा था- हवा में नमी बढ़ रही थी और कोहरा अब घना होकर मेरी तरफ़ बढ़ रहा था। अचानक- मेरी पीठ पर- शायद किसी ने ठंडा हाथ रख दिया। या मुझे ऐसा लगा। मैं तेज़ी से मुड़ा- बिल्कुल पीछे मुड़ा- वहाँ कोई नहीं था। लेकिन मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज़ हो गई कि मुझे लगा वो मेरे कानों में बज रही है। यह अहसास इतना वास्तविक था- इतना शारीरिक- कि मैं पूरी तरह से डर के मारे काँप रहा था। यह सिर्फ कल्पना नहीं हो सकती थी।
और क्या आपको पता है? वहाँ दीवार पर- किसी ने बहुत पुरानी- खरोंची हुई हिंदी में लिखा था: “वो देख रहा है।”
जंगल की ताक़त और पागलपन की ओर खिंचाव
डाउ हिल का सबसे ख़तरनाक पहलू न तो सिर कटा लड़का है और न ही स्कूल की पदचाप। इसका सबसे ख़ौफ़नाक हिस्सा इस जगह की वह मानसिक पकड़ है- जो यहाँ आने वाले हर इंसान पर बनती है।
कई पर्यटक जो यहाँ कुछ दिन रुके हैं- उन्होंने अनुभव किया कि उन्हें लगातार कोई देख रहा है- पीछा कर रहा है। यह निगरानी का अहसास इतना तीव्र होता है कि लोग अपनी छाया से भी डरने लगते हैं। मेरे लिए- यह चीज़- इसका मनोवैज्ञानिक पक्ष- ज़्यादा डरावना था। आप डर के कारण पागल हो रहे हैं। यह वही बात है जो मेरी पत्नी ने मुझे कही थी- “तुम जहाँ भी जाओगे- तुम्हारा दिमाग ही तुम्हें डरायेगा।”
लेकिन यहाँ का डर बाहर से आता था। मैं वापस अपनी कार की तरफ़ तेज़ी से जाने लगा- मैं वहाँ और नहीं रुकना चाहता था। जब मैं डेथ रोड के किनारे चल रहा था- मेरा पैर अचानक से फिसल गया- मिट्टी बहुत नरम थी। मैंने खुद को गिरने से बचाया- लेकिन जैसे ही मैंने नीचे देखा- मेरी टॉर्च की रौशनी में- मुझे मिट्टी में कुछ गहरा- लाल- दिखा। खून?
Actually, come to think of it, यह शायद लाल मिट्टी या काई थी- पर उस वक्त- मेरे दिमाग ने तुरंत उसे मानव रक्त मान लिया। यह वह बिंदु था जहाँ डाउ हिल ने मेरे दिमाग को कंट्रोल करना शुरू कर दिया था।
सड़क के किनारे बहुत सारी सूखी हुई पत्तियाँ थीं- और जब मैं चल रहा था- तो मुझे लगा कि मेरे हर कदम के साथ- कुछ और भी पत्तों पर चल रहा है। मैं अब पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता था- लेकिन मेरे भीतर एक दबाव था- एक असहनीय खिंचाव- जो मुझे पीछे देखने के लिए मजबूर कर रहा था। जैसे कोई मुझे बुला रहा हो- लेकिन आवाज़ नहीं आ रही थी- सिर्फ़ एक गहरा- गूंगा आह्वान।
मेरा दिल अब पूरी तरह से ख़ौफ़ से भरा था। यह ख़ौफ़ इतना शुद्ध था कि मैं साँस भी नहीं ले पा रहा था। मुझे लगा जैसे मैं डूब रहा हूँ- पानी में नहीं- बल्कि अँधेरे के एक समुद्र में। यह जगह सिर्फ़ भूतों की नहीं थी- यह जगह ही खुद एक भूत थी। एक जीवित- साँस लेता हुआ- शैतान। इसका अपना एक गहरा- प्राचीन- साया था।
आखिरकार- मैं कार तक पहुँचा। मेरी साँसें तेज़ थीं- शरीर पसीने से भीगा हुआ था- जबकि बाहर ठंड थी। मैंने ड्राइवर से कहा कि तुरंत गाड़ी निकाले। वह बिना कुछ कहे तुरंत इंजन स्टार्ट किया। हम तेज़ी से नीचे की ओर जाने लगे- उस जंगल से दूर- उस साये से दूर जो हमें निगलने को तैयार था।
गाड़ी चल रही थी- और जैसे ही हम उस डेथ रोड से दूर निकले- एक पल के लिए- मैंने रियर-व्यू मिरर में देखा। सड़क खाली थी- पेड़ अब धुंध में लिपटे थे। लेकिन- हाँ- मुझे अब भी लगता है- मैंने कार के ठीक पीछे- पेड़ की आड़ में- एक परछाईं देखी। वह हिल नहीं रही थी- बस खड़ी थी।
मुझे नहीं पता वो छोटा लड़का था- या स्कूल का कोई भूत- या बस उस जगह की काली ऊर्जा। शायद मैं पागल हो गया था।
लेकिन मेरा मानना है कि डाउ हिल के जंगलों में जो भी होता है- वो सिर्फ़ देखना नहीं है- वो आपके अंदर प्रवेश कर जाता है। और एक बार जब वो अंदर आ जाता है- तो फिर निकलना उसके लिए नामुमकिन हो जाता है। आप बस उसका हिस्सा बन कर रह जाते हैं। क्या मैं अब भी उसका हिस्सा हूँ?
जब मैंने उस भयानक जगह को छोड़ा- तो मुझे लगा जैसे कुछ मेरा साथ छोड़ गया हो- या शायद कुछ मेरे साथ आ गया हो। क्या मेरी अगली कहानी वही लिखेगी जो मैंने वहाँ नहीं देखा- पर महसूस किया?








