हृदय रोग का खतरा: 12 साल पहले ही कम होने लगती है आपकी कसरत – एक महत्वपूर्ण चेतावनी
क्या आप जानते हैं कि हृदय रोग (Cardiovascular disease) जिसे हम अक्सर अचानक आई परेशानी मानते हैं, वह वास्तव में आपको सालों पहले ही चेतावनी देना शुरू कर देता है? मेडिकल न्यूज टुडे द्वारा सामने लाए गए एक नए अध्ययन में दिल की सेहत से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।
शोधकर्ताओं ने एक ऐसा लिंक खोजा है जो बताता है कि हृदय रोग की शुरुआत (onset) होने से पूरे 12 साल पहले ही, लोग अनजाने में अपनी शारीरिक गतिविधि और व्यायाम कम कर देते हैं। यह जानकारी दिल की बीमारियों की रोकथाम के लिए एक अर्ली-वार्निंग-सिग्नल (जल्द चेतावनी संकेत) की तरह है।
12 साल पहले की चेतावनी: क्या कहता है यह शोध?
हम अक्सर सोचते हैं कि जब कोई व्यक्ति बीमार होता है, तब वह कम कसरत करना शुरू करता है। लेकिन यह अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है। शोध में पाया गया कि जिन लोगों को बाद में हृदय रोग या संबंधित समस्याएँ हुईं, उन्होंने बीमारी के नैदानिक-रूप से स्पष्ट होने से लगभग 12 साल पहले ही अपनी दैनिक गतिविधियों जैसे- चलना, जॉगिंग या जिम जाना धीरे-धीरे कम कर दिया था।
कल्पना कीजिए, एक दशक से भी ज्यादा समय पहले ही हमारा शरीर हमें एक ‘साइलेंट वार्निंग’ दे रहा होता है। यह सिर्फ थकान का मामला नहीं है- बल्कि यह एक गहरा शारीरिक बदलाव है, जो बीमारी की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा होता है। यह गतिविधि में कमी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने वाले एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में कार्य करती है।
यह आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
एक दोस्त की तरह बात करें तो, इस रिसर्च का सबसे बड़ा सबक यह है कि हमें अपने डेली रूटीन की शारीरिक गतिविधि पर गंभीर ध्यान देना चाहिए। अपने शरीर के संकेतों को कभी भी नजरअंदाज न करें। यदि आप पाते हैं कि:
- आपकी ऊर्जा (energy) का स्तर बेवजह कम हो गया है और आप कम सक्रिय महसूस कर रहे हैं।
- आप बिना किसी चोट या स्पष्ट कारण के अपनी पुरानी वॉक या एक्सरसाइज पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
- आप अक्सर बैठे रहना पसंद करने लगे हैं, जबकि पहले आप सक्रिय थे।
यह सब कुछ 12 साल बाद आने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरे का संकेत हो सकता है। यह दिखाता है कि व्यायाम की क्रमिक कमी एक बड़ा जोखिम कारक है, जिसे हृदय रोग की रोकथाम के लिए शुरुआती चरण में ही पहचानना आवश्यक है।
निष्कर्ष: आज का व्यायाम, कल का स्वस्थ दिल
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि निष्क्रियता (Inactivity) को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि आप देखते हैं कि आप लगातार कम शारीरिक गतिविधि कर रहे हैं, तो इसे केवल उम्र का असर मानकर टालें नहीं।
यह स्पष्ट संकेत है कि हमें ‘आज’ के छोटे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका असर ‘कल’ की बड़ी बीमारियों पर पड़ सकता है। अपने दिल को स्वस्थ रखने का सीधा गणित है- सक्रिय रहिए और अपने व्यायाम की आदतों में आई गिरावट पर तुरंत ध्यान दीजिए।








