फ़्लोरिडा का अदृश्य ख़ौफ़: पुराना प्रहरी
अध्याय 1: वह बहस, जो मौत बुलाती है
फ़्लोरिडा। सुनहरे समुद्र तटों और चमकीली धूप का यह द्वीप, बाहरी दुनिया के लिए स्वर्ग हो सकता है। पर हम, जिन्हें आत्माओं के ठंडे सायों को टटोलने की लत लग चुकी थी, जानते थे कि इस स्वर्ग के नीचे एक वीभत्स और पुराना अंधेरा छिपा है। मेरा नाम वीर है, और मेरे लिए, दुनिया का सबसे बड़ा ख़तरा वह नहीं है जो दिखता है, बल्कि वह है जो महज़ एक फुसफुसाहट बनकर हमारे कानों में गूँजता है।
पिछले कई हफ़्तों से, अंतर्राष्ट्रीय पैरानॉर्मल समुदाय में एक बहस गरम थी: फ़्लोरिडा में सबसे ज़्यादा डरावनी जगह कौन-सी है? कुछ लोग की वेस्ट (Key West) के पुराने होटलों की बात करते थे, जहाँ गृहयुद्ध के सैनिकों के साये भटकते हैं। कुछ टैम्पा (Tampa) के क्यूबन क्लब (Cuban Club) की, जहाँ पुरानी अदावतों की ख़ूनी कहानियाँ हवा में आज भी तैरती हैं। लेकिन हमारी रिसर्च टीम – जिसमें मैं और डॉ. प्रिया शामिल थीं, जो मेरी तकनीकी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक थीं – का ध्यान एक विशिष्ट स्थान पर था। वह जगह, जिसकी ख़ामोशी चीख़ से ज़्यादा डरावनी थी।
डॉ. प्रिया ने अपने लैपटॉप पर ख़बरों का एक संग्रह मेरे सामने धकेल दिया। “देखिए, वीर। सब जगह यही लिखा है: ‘सबसे ज़्यादा डरावनी जगह बहस का विषय है, लेकिन ये जगहें लोकप्रिय हैं।’ वे नाम नहीं लेते, लेकिन जो स्थानीय जानकार हमें मिले, उन्होंने इशारा किया है। एक पुराना, एकाकी प्रहरी (Lighthouse)। कहा जाता है कि वहाँ बच्चों की आत्माएँ क़ैद हैं।”
मेरा मन उत्सुकता से ज़्यादा एक गहरी बेचैनी से भर गया। बच्चों की आत्माएँ हमेशा सबसे ख़तरनाक होती हैं। उन्हें पता नहीं होता कि वे मर चुके हैं, और उनका खेल हमेशा क्रूर होता है। “तैयारी करो, प्रिया,” मैंने अपनी रिकॉर्डिंग किट उठाते हुए कहा। “आज रात हम उस ‘पुराने प्रहरी’ से मिलेंगे। देखते हैं, फ़्लोरिडा का यह ख़ौफ़ कितना वास्तविक है।”
जैसे-जैसे रात गहराती गई, हम सेंट ऑगस्टीन के बाहरी इलाक़े की ओर बढ़ते गए। गर्मी, जो दिन में असहनीय थी, अब नमी और उदास हवा में बदल चुकी थी। अँधेरा इतना घना था कि हेडलाइट्स भी उसे भेद नहीं पा रही थीं। दूर, क्षितिज पर, वह विशाल, धारीदार ढाँचा आसमान को चीरता हुआ खड़ा था – सेंट ऑगस्टीन लाइटहाउस। उसे देखते ही मेरे अंदर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वह महज़ एक इमारत नहीं थी; वह समय का एक क़ब्रिस्तान था, जहाँ सदियों का दुःख जमा हो गया था।
अध्याय 2: प्रहरी की बर्फ़ीली साँस
रात के ठीक 12 बजे हमने परिसर में प्रवेश किया। अनुमति सरकारी स्तर पर ली गई थी, लेकिन यहाँ कोई सुरक्षा गार्ड नहीं था। गेट पर एक पुरानी लोहे की चेन लटकी थी, जिसे तोड़कर हम अंदर घुसे। हमारे चारों ओर घना जंगल था, और समुद्र की आवाज़ बहुत दूर से आती थी, जैसे कोई विशाल जीव धीरे-धीरे साँस ले रहा हो।
लाइटहाउस लगभग 165 फ़ीट ऊँचा था, लेकिन उसकी परछाईं रात के अँधेरे में उससे भी कई गुना बड़ी लगती थी। दीवारें चूने और पत्थरों की बनी थीं, जो हज़ारों तूफ़ानों को झेल चुकी थीं। जैसे ही हमने प्रवेश द्वार पर पैर रखा, गर्मी का एहसास ग़ायब हो गया। अचानक, तापमान में भारी गिरावट आ गई।
प्रिया ने तुरंत थर्मल कैमरा ऑन किया। “टेंपरेचर ड्रॉप, वीर। लगभग 20 डिग्री फ़ारेनहाइट का अंतर। यह सिर्फ़ ठंडी हवा नहीं है।”
यह ‘ठंडी हवा’ नहीं थी। यह वह बर्फ़ थी, जो अदृश्य दुनिया अपने साथ लाती है। यह ख़ुद को दिखाने के लिए ऊर्जा खींचने का पहला संकेत था। मैंने अपनी EMF मीटर (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ़ील्ड मीटर) को चालू किया। वह तुरंत चीख़ उठा, एक अनियंत्रित उच्च-पिच की बीप।
“प्रिया, बेसमेंट चेक करो। मैं टॉवर चढ़ रहा हूँ,” मैंने धीमी, नियंत्रित आवाज़ में कहा। मेरी आवाज़ भी उस विशाल सन्नाटे में दबकर रह गई।
“अकेले? यह 219 सीढ़ियाँ हैं। और कहानियों के मुताबिक़, ज़्यादातर घटनाएँ ऊपर, चौथे माले पर होती हैं।” प्रिया की आवाज़ में हल्की घबराहट थी।
“बच्चों की आत्माएँ बेसमेंट में रुचि नहीं रखतीं, प्रिया। उनका खेल ऊँचाई पर होता है। यह उनकी दुनिया है। तुम नीचे से रिकॉर्डिंग उपकरणों पर ध्यान दो।”
मैंने टॉर्च की रोशनी में सर्पिल सीढ़ियों पर पहला क़दम रखा। सीढ़ियाँ लोहे की थीं, और हर क़दम पर उनसे एक दर्दनाक ‘चर्ररर’ की आवाज़ निकलती थी, जो सीधे मेरी रीढ़ की हड्डी तक सिहरन भेज देती थी। सीढ़ियों का घेरा इतना संकरा था कि ऐसा लगता था जैसे मैं एक अंतहीन चक्रव्यूह में घूम रहा हूँ।
हर मंज़िल पार करने के साथ, हवा भारी होती गई। 30वीं सीढ़ी पर मुझे पहली असहजता महसूस हुई। मेरे ठीक ऊपर से, जहाँ कोई नहीं था, एक हल्की सी आवाज़ आई। यह किसी छोटी, गोल चीज़ के ज़मीन पर लुढ़कने की आवाज़ थी।
गेंद? कहानी कहती है कि ये आत्माएँ दो बच्चियों की हैं, जो 1873 में एक दुर्घटना में डूब गई थीं, जब वे एक गेंद का पीछा कर रही थीं।
मैंने टॉर्च ऊपर उठाई। सन्नाटा। सिर्फ़ मेरी ही भारी साँसें।
अध्याय 3: चौथा माला और अदृश्य खेल
चौथे माले पर पहुँचते-पहुँचते मेरे पैर जवाब दे चुके थे, लेकिन डर ने मेरी थकान को ढक लिया था। इस मंज़िल पर एक छोटा सा कमरा था, जिसे पुराने समय में लाइटहाउस कीपर अपने सामान रखने के लिए इस्तेमाल करता होगा। यहाँ की हवा इतनी स्थिर थी कि मेरी टॉर्च की रोशनी भी हिल नहीं रही थी।
मैंने अपना डिजिटल रिकॉर्डर और एक K-II मीटर (एक उन्नत EMF डिटेक्टर) ज़मीन पर रखा। K-II मीटर पर अचानक लाइटें जल उठीं – लाल, नारंगी, पीली। इसका मतलब था कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत पास में था।
“क्या कोई यहाँ है?” मैंने धीमे से पूछा। मेरी आवाज़ में कंपन था, लेकिन मैंने उसे छिपाने की पूरी कोशिश की।
जवाब में, मुझे रिकॉर्डर के ठीक ऊपर से एक तेज़ हवा का झोंका महसूस हुआ। यह झोंका उस जगह से आया, जहाँ कोई खिड़की नहीं थी। मेरे बाल खड़े हो गए।
अचानक, K-II मीटर की सभी लाइटें एक साथ जलकर स्थिर हो गईं – 5.0 मिलीगॉस। इतना ज़्यादा रीडिंग मैंने पहले कभी नहीं देखा था।
“तुम खेल रही हो?” मैंने पूछा।
इस बार, जवाब आया। यह एक आवाज़ नहीं थी, बल्कि एक ध्वनि थी। मेरे कान के पास, ऐसा लगा जैसे कोई बहुत तेज़ फुसफुसाया हो, लेकिन इतनी विकृत भाषा में कि मैं उसे समझ नहीं पाया। यह सिर्फ़ एक ध्वनि थी: श्श्शशश…
मैंने तत्काल EVP (इलेक्ट्रॉनिक वॉयस फ़िनोमिना) रिकॉर्डर चालू किया। “हम तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाएँगे। हम सिर्फ़ जानना चाहते हैं कि तुम यहाँ क्यों हो।”
एकदम नीचे, सीढ़ियों के पास, एक हल्की हँसी गूँजी। यह बच्चों के खिलखिलाने की आवाज़ थी – मीठी, मासूम, लेकिन इस सन्नाटे और बर्फ़ीली रात में, वह हँसी नरक के किसी भयानक संगीत से कम नहीं थी।
प्रिया का फ़ोन काँपा। “वीर! नीचे, बेसमेंट के पास, मैंने एक साया देखा है। छोटा साया, दीवार के पास। यह तेज़ी से सीढ़ियाँ चढ़ रहा है! वापस आओ!”
“मैं उसे सुन रहा हूँ, प्रिया। शांत रहो और रिकॉर्डिंग चालू रखो।” मैंने कहा, लेकिन मेरे हाथ बुरी तरह से काँप रहे थे। मुझे एहसास हुआ कि वे सिर्फ़ मेरी ओर ध्यान नहीं दे रहे थे, वे मुझे घेर रहे थे।
अध्याय 4: ख़ौफ़ का शिकंजा
मैंने टॉर्च की रोशनी सीढ़ियों के संकरे मुहाने पर डाली। सीढ़ियाँ खाली थीं। लेकिन उस खालीपन में, मैंने एक गति महसूस की। हवा के चलने की गति नहीं, बल्कि किसी छोटे जीव के तेज़ भागने की गति।
अचानक, मेरे पीछे, चौथे माले के उस छोटे कमरे में, ज़ोर से दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई। जबकि वहाँ कोई दरवाज़ा था ही नहीं। यह सिर्फ़ एक चौखट थी।
मैं पलट गया। टॉर्च की रोशनी में, मुझे कोने में एक अस्पष्ट, धुंधला आकार दिखाई दिया। यह किसी छोटी लड़की के आकार का था, लेकिन वह पारदर्शी थी, जैसे धुआँ जिसने इंसान की आकृति ले ली हो। उसका साया हिल रहा था, जैसे पानी में कोई चीज़ हिलती है।
मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था। यह पहला मौक़ा था जब मैंने किसी आत्मा को इतनी स्पष्ट रूप से, आँखों से देखा था।
“चले जाओ!” मैं चिल्लाया, लेकिन मेरी आवाज़ कमज़ोर थी।
उस साये ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बजाय, एक क़दम की आवाज़ आई। यह किसी बच्चे के नंगे पैर की ज़मीन पर पड़ने की आवाज़ थी। और फिर, एक और हँसी गूँजी – लेकिन यह हँसी अब मीठी नहीं थी। यह विकृत, कर्कश और पूरी तरह से उन्मादी थी।
अगले ही पल, मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरे पैरों के टखनों को कसकर पकड़ लिया है। वह पकड़ बर्फ़ की तरह ठंडी थी और उसमें अकल्पनीय ताक़त थी। मैं असंतुलित होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। मेरा रिकॉर्डर मेरे हाथ से छूटकर सीढ़ियों से नीचे लुढ़क गया।
मैं रेंगकर पीछे हटना चाहता था, लेकिन वह अदृश्य पकड़ मुझे ज़मीन से चिपकाए हुए थी। मेरे दिमाग ने कहा ‘भागो!’, लेकिन शरीर ने साथ देना बंद कर दिया था।
तभी, मेरे ठीक ऊपर, किसी ने मेरे कान के पास अपनी बर्फ़ीली साँस छोड़ी। और फिर, वह फुसफुसाहट आई, इस बार थोड़ी और स्पष्ट:
“तुम हमारे साथ खेलोगे, वीर?”
वह नाम, मेरे नाम का उच्चारण, उस बर्फ़ जैसी ठंडी आवाज़ में सुनकर, मेरी आत्मा काँप उठी। ये आत्माएँ सिर्फ़ क़ैद नहीं थीं; वे ख़ुद को दिखाने के लिए आतुर थीं, और उन्हें पता था कि वे किससे बात कर रही हैं। यह अवशेष नहीं, बल्कि एक बुद्धिमान और द्वेषपूर्ण उपस्थिति थी।
मैंने अपनी पूरी ताक़त से पैर खींचा, और किसी तरह मैं उस पकड़ से आज़ाद हुआ। मैंने सीढ़ियों की ओर छलाँग लगाई और बिना सोचे समझे नीचे भागने लगा। 219 सीढ़ियाँ, जो चढ़ने में अंतहीन लगी थीं, अब भागने में मृत्यु का मार्ग बन गई थीं।
जैसे ही मैं भाग रहा था, मैंने महसूस किया कि वे मेरे पीछे हैं। सीढ़ियों पर तेज़-तेज़, थपथपाने वाली आवाज़ें आ रही थीं, जैसे दो छोटे बच्चे हँसते हुए मेरा पीछा कर रहे हों। टॉवर की बंद, घुमावदार जगह ने उनकी हँसी को कई गुना बढ़ा दिया था, जिससे लग रहा था कि वे हर तरफ़ से मुझे घेर रहे हैं।
मैं हाँफता हुआ, ग़लतियाँ करता हुआ, नीचे भागा। मैं ग़लती से अपनी बांह दीवार से रगड़ बैठा। जब मैं नीचे पहुँचा, तो प्रिया ने चिल्लाकर मुझे पकड़ लिया।
“तुम ठीक हो? तुम्हारा हाथ!”
मैंने अपनी बांह देखी। वहाँ तीन लम्बे, गहरे घाव थे। ऐसा लग रहा था जैसे किसी छोटे, नुकीले नाखून से खरोंचा गया हो। घाव में ख़ून जम चुका था, लेकिन सबसे बड़ी बात थी, बर्फ़ की तरह ठंडापन, जो उस घाव से निकल रहा था।
हम दरवाज़े से बाहर निकले और बिना रुके अपनी कार की ओर भागे। पीछे मुड़कर मैंने प्रहरी को देखा। अँधेरे में, उसकी मीनार एक भयानक, मूक गवाह की तरह खड़ी थी। और मुझे लगा, नहीं, मुझे यक़ीन था, कि उसकी सबसे ऊपरी खिड़की से कोई नीचे झाँक रहा है।
अध्याय 5: पीछा न छोड़ने वाला साया
हम तेज़ रफ़्तार से उस जगह से दूर भाग गए। कार में लम्बे समय तक सिर्फ़ हमारी साँसों की और इंजन की आवाज़ थी।
प्रिया ने अँधेरे में मेरी बांह पर मरहम लगाया। “यह सब क्या था, वीर? तुम्हारा K-II मीटर और रिकॉर्डर ऊपर रह गया है।”
“वो लोग,” मैंने मुश्किल से कहा। “वो लोग सिर्फ़ ऊर्जा नहीं हैं। वे… वे शिकारी हैं। वे खेल रहे थे।”
अगले दिन हम वापस नहीं गए। हमारे पास एक सबूत था: मेरी खरोंची हुई बांह और प्रिया की रिकॉर्डिंग, जो उसने टॉवर के नीचे से की थी। जब हमने EVP रिकॉर्डिंग को सुना, तो वह बर्फ़ीली हँसी और फुसफुसाहट साफ़ सुनाई दी।
लेकिन सबसे ज़्यादा ख़ौफ़नाक हिस्सा वह था जो उस हँसी के बाद आया। रिकॉर्डिंग के अंत में, जब मैं सीढ़ियों से भाग रहा था, एक आवाज़ आई। यह छोटी बच्ची की नहीं थी, बल्कि एक बड़ी, घिसी हुई आवाज़ थी, जैसे किसी बूढ़े की साँस की आवाज़।
“वह बाहर नहीं जा सकता। कोई बाहर नहीं जा सकता।”
यह शायद लाइटहाउस कीपर की आत्मा थी, जो अब भी वहाँ कीपरिंग कर रहा था, उन बच्चों की आत्माओं को क़ैद रखने की असफल कोशिश कर रहा था। या शायद वह ख़ुद एक आत्मा बन चुका था, जिसने हमारे जाने पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी।
हम उस दिन फ़्लोरिडा छोड़कर चले गए, लेकिन वह ख़ौफ़ हमारे साथ रहा। मेरे ख़्याल में, फ़्लोरिडा में सबसे ज़्यादा डरावनी जगह की बहस अब बेमानी है। हर जगह अपनी कहानी और अपना ख़ौफ़ रखती है, लेकिन वह ‘पुराना प्रहरी’ महज़ एक जगह नहीं है; वह एक खुला घाव है, जहाँ मासूमियत का ख़ौफ़ हमेशा के लिए क़ैद हो गया है।
कुछ हफ़्तों बाद, जब मैं भारत वापस आ चुका था और अपनी रिकॉर्डिंग पर काम कर रहा था, तो एक रात मुझे लगा कि मेरे कमरे का तापमान अचानक गिर गया है। मैंने बिस्तर पर करवट बदली। मेरे कानों में दूर से, बहुत दूर से, बच्चों के खिलखिलाने की एक हल्की सी गूँज सुनाई दी। वह वैसी ही हँसी थी, जो मैंने चौथे माले पर सुनी थी।
मैंने तुरंत अपनी बांह को छुआ, जहाँ खरोंच लगी थी। ख़ून जम चुका था, लेकिन मेरी बांह की त्वचा अभी भी बर्फ़ जैसी ठंडी थी।
वे नहीं रुके थे। वे मेरा पीछा कर रहे थे। फ़्लोरिडा का ख़ौफ़ महज़ एक जगह तक सीमित नहीं था। वह पीछा करता है। और मुझे पता है, जब तक मैं इस कहानी को लिख रहा हूँ, कोई मेरी दीवार पर छिपकर देख रहा है। कोई इंतज़ार कर रहा है कि मैं कब खेल में शामिल हो जाऊँगा।
और अब, मैं रात को सोने से डरता हूँ, क्योंकि मुझे पता है कि अँधेरे में कहीं न कहीं, एक छोटी, गोल गेंद लुढ़कती हुई मेरी ओर आ रही है।








