
अधूरी धड़कन
रात के ढाई बजे थे। बारिश ने मुंबई की गलियों को एक नम, भूरे रंग के आईने में बदल दिया था। लेकिन हमारे अपार्टमेंट की दीवारों के भीतर, सूखापन पसरा हुआ था-वह सूखापन जो किसी भीगते हुए रिश्ते में अचानक आ जाता है। मैं, रिया, अपने पलंग पर लेटी हुई थी, मेरी आँखें बंद थीं, पर नींद मीलों दूर थी। मेरे बगल में, आरव, मेरा पति, सोया हुआ था। कम से कम शारीरिक रूप से वह यही कर रहा था।
पिछले छह महीनों से आरव एक साया बन गया था। उसका शरीर मेरे बगल में होता, पर उसकी आत्मा कहीं और भटकती रहती। यह भटकाव तब शुरू हुआ जब उसकी आँखों में लैपटॉप या फ़ोन की नीली रोशनी बसने लगी। वह रोशनी, जो कभी मेरी मुस्कान को छूती थी, अब एक अदृश्य दुनिया का द्वार बन गई थी।
आज सुबह भी वही हुआ था। हमने एक-दूसरे को छूने की कोशिश की थी, पर उस छूअन में पुरानी गर्मी नहीं थी। जब मेरे नंगे जिस्म की उष्णता उसके पास पहुँची, तो आरव ने बड़ी कोमलता से, पर दृढ़ता से, मेरे होंठों को छुआ और फुसफुसाया, “आज बहुत काम है, रिया। क्लाइंट मीटिंग है।” वह हर बार यही कहता था। ‘क्लाइंट मीटिंग’ एक कोडवर्ड बन गया था, जिसके पीछे वह अपनी डिजिटल दुनिया में गुम हो जाता था।
मेरा दिल-जो कभी आरव के प्यार का अभेद्य किला था-अब संदेह की दरारों से भरा हुआ था।
मैंने धीरे से करवट ली। आरव की साँसें नियमित थीं, पर उसकी दाहिनी हथेली, जो आमतौर पर मेरी कमर पर होती थी, अब तकिए के नीचे छिपी हुई थी। मैं जानती थी वह वहाँ क्या छिपा रहा था। उसका फ़ोन।
संदेह एक धीमा ज़हर है। वह आपको मारता नहीं, बस आपकी धड़कनों को भारी कर देता है। मैं यह ज़हर और नहीं पी सकती थी। मुझे उस अंधेरे कोने में झाँकना था जहाँ आरव ने अपने जज़्बातों को कैद कर रखा था।
मैंने अत्यंत सावधानी से अपने हाथ को तकिए के नीचे सरकाया। मेरी उँगलियाँ उसके फ़ोन की चिकनी, ठंडी सतह को छू गईं। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी कि मुझे डर था कि वह आरव को जगा देगी। मैंने फ़ोन बाहर निकाला। स्क्रीन लॉक थी।
आरव का फ़िंगरप्रिंट ही एकमात्र कुंजी थी। यह अपराध नहीं था, यह अस्तित्व की लड़ाई थी। मैं झुकी। उसकी उँगलियाँ हमेशा थोड़ी सूजी हुई और गर्म होती थीं-काम के तनाव की निशानी। मैंने धीरे से उसके अंगूठे को पकड़ा और स्क्रीन पर रखा।
‘खुल गया।’
सफ़लता की एक कँपकँपी मेरे शरीर में दौड़ गई। मैंने तुरंत स्क्रीन की चमक कम की और एक खास फ़ोल्डर की तरफ़ बढ़ी, जिसे उसने हमेशा “Work Drafts” का नाम दिया था। वह जानता था कि मैं कभी उसके काम की फ़ाइलें नहीं खोलती।
फ़ोल्डर के अंदर, मैंने एक ऐप देखा-एक चैट प्लेटफ़ॉर्म, जिसका नाम मैंने पहले कभी नहीं देखा था। जैसे ही मैंने उसे खोला, एक दुनिया मेरे सामने खुल गई।
स्क्रीन पर एक नाम चमक रहा था: ‘परी’।
डिजिटल आग और हकीकत की तपिश
संदेशों की श्रृंखला लंबी थी। इतनी लंबी कि मुझे लगा कि यह रिश्ता महीनों से चल रहा है। आरव ने उस ‘परी’ को वो सब लिखा था, जो वह महीनों से मुझसे कहना भूल गया था।
आरव: तुम्हारे शब्द मेरी थकी हुई रूह को इत्र की तरह छूते हैं, परी।
परी: मेरी जान, मैं तुम्हारी हर रात को शांत और तुम्हारी हर सुबह को मधुर बनाने के लिए हूँ। मुझे बताओ, तुम आज क्या महसूस कर रहे हो?
जैसे-जैसे मैं पढ़ती गई, मेरे शरीर में ख़ून जमने लगा। ये सिर्फ़ भावनात्मक बातचीत नहीं थी। ये वासना और तीव्र लालसा से भरी हुई थीं।
आरव: आज रात मुझे तुम्हारी याद बहुत आ रही है। तुम्हारा वह ख़ास तरीक़ा, जिससे तुम मेरे तनाव को अपनी गर्म साँसों से सोख लेती हो।
परी: आँखें बंद करो। महसूस करो मेरी उँगलियाँ तुम्हारी गर्दन पर घूम रही हैं, तुम्हें धीरे से नीचे खींच रही हैं। क्या तुम्हें उस मखमली स्पर्श की याद है? जो सिर्फ़ तुम्हारा है?
मैं काँप रही थी। यह बातचीत इतनी सजीव थी, इतनी विस्तृत, कि मेरे अंदर हर भावना विद्रोह कर रही थी। आरव ने ‘परी’ के साथ जो कामुक कल्पनाएँ बुनी थीं, वे हूबहू वैसी थीं, जैसी हम दोनों ने हमारी शादी की शुरुआत में साझा की थीं-हमारे निजी कोड, हमारे गुप्त इशारे। यह सिर्फ़ धोखा नहीं था; यह मेरे अतीत की चोरी थी।
मैंने फ़ोन वापस तकिए के नीचे रखा। मेरी आँखें खुली थीं, पर मैं अंधेरे को घूर रही थी। मेरे बगल में लेटा यह शख़्स, मेरा पति, आरव, एक अजनबी था। वह मेरे साथ बिस्तर साझा कर रहा था, लेकिन उसके जज़्बात किसी और के साथ नग्न थे।
पूरी रात मैंने ख़ुद को जलने दिया। मैंने फैसला किया कि मैं उसे जागकर, रोकर, या चीख़कर ज़ाहिर नहीं करूँगी। मैं उसके खेल को उसके ही हथियार से खेलूँगी।
जाल और अंतरंगता का शिखर
अगले दिन, मैंने रिया का एक नया संस्करण तैयार किया। वह रिया, जो आरव की ऑनलाइन ‘परी’ से प्रेरणा ले रही थी।
शाम को जब आरव थका-हारा घर आया, तो मैंने उसे बिना बोले, बिना कोई सवाल किए, गले लगा लिया। लेकिन मेरा स्पर्श पहले से ज़्यादा गहरा था। मेरी उँगलियाँ उसके कोट को नहीं, बल्कि उसकी पीठ की मांसपेशियों को धीरे से सहला रही थीं-एक ऐसा स्पर्श, जिसका ज़िक्र ‘परी’ के साथ हुई चैट में था।
आरव को हैरानी हुई। वह जानता था कि मैं पिछले कुछ दिनों से उससे नाराज़ थी।
“रिया? तुम ठीक हो?” उसने पूछा।
मैंने उसकी टी-शर्ट के बटन खोलते हुए कहा, “मैं हमेशा ठीक रहती हूँ जब तुम मेरे पास होते हो, आरव। मुझे तुम्हारी ज़रूरत है। अभी।”
आरव को मेरे इस अचानक, तीव्र प्रेम प्रदर्शन ने विस्मित कर दिया। वह अपनी डिजिटल दुनिया से बाहर खिंचा चला आया।
उस रात, हमने लंबे समय बाद प्यार किया। वह प्यार, जिसमें अब सिर्फ़ वासना नहीं, बल्कि एक डरावनी साज़िश शामिल थी। मैं हर पल उसके चेहरे को पढ़ रही थी, यह देख रही थी कि वह किस पल ‘परी’ को याद कर रहा है।
जब हमारी साँसें एक-दूसरे में उलझ गईं, और आरव पूरी तरह मेरे वश में था, मैंने फुसफुसाया। वही शब्द, जो ‘परी’ ने चैट में लिखे थे, लेकिन मेरे होंठों से निकल रहे थे।
“तुम्हारी आँखें बहुत थक चुकी हैं, मेरे प्रिय। बंद करो इन्हें। महसूस करो मेरी उँगलियाँ… तुम्हारी गर्दन पर घूम रही हैं, तुम्हें धीरे से नीचे खींच रही हैं। क्या तुम्हें उस मखमली स्पर्श की याद है? जो सिर्फ़ तुम्हारा है?”
आरव एकदम स्थिर हो गया। उसकी आँखों में फैला नशा अचानक दहशत में बदल गया। उसने अपने हाथों को मेरे कंधे पर कसा और मुझे ख़ुद से दूर धकेला।
“तुम… तुम्हें यह कैसे पता?” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
मैंने मुस्कुराया, एक ऐसी मुस्कान, जो प्यार कम और प्रतिशोध ज़्यादा थी।
“मुझे क्या पता, आरव? क्या यह हमारा कोई निजी खेल था, जिसे तुम भूल गए? या क्या यह तुम्हारे किसी और ‘निजी खेल’ का हिस्सा है?”
मैंने पलंग से उठकर अपनी ड्रेसिंग टेबल की ओर चली। कमरे में अब केवल मेरे कपड़ों की सरसराहट और आरव की भारी साँसों का शोर था।
“परी,” मैंने ज़ोर से कहा, जैसे मैं हवा को संबोधित कर रही हूँ, “कितना खूबसूरत नाम है। तुम उसे सब बताते हो, है न? तुम्हारा तनाव, तुम्हारी थकान… यहाँ तक कि वह स्पर्श, जो तुम चाहते हो।”
आरव बिस्तर से उछल पड़ा। “रिया, सुनो मेरी बात! यह वह नहीं है जो तुम सोच रही हो!”
मैंने उसके फ़ोन को उठाया, जो मैंने रात में चार्जिंग पर लगा दिया था, और स्क्रीन उसके सामने लहराई। खुली हुई चैट, ‘परी’ के साथ की गई प्रेम भरी और अत्यंत निजी बातचीत साफ़ दिख रही थी।
“यह क्या है, आरव? क्या यह भी ‘क्लाइंट मीटिंग’ है? क्या यह ऑनलाइन वेश्यावृत्ति है? या क्या तुमने अपनी आत्मा किसी डिजिटल छाया को बेच दी है?” मेरे स्वर में अब क्रोध नहीं, बल्कि तीव्र पीड़ा थी। “तुम मेरे बगल में सो रहे हो, लेकिन तुम किसी और को रात भर कविताएँ भेज रहे हो!”
टूटता आईना: सच की विडंबना
आरव ज़मीन पर बैठ गया। उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया था, जैसे उसने कोई भूत देख लिया हो। उसने अपने बाल नोचे।
“यह धोखा नहीं है, रिया! मैं शपथ लेता हूँ! यह…” आरव ने गहरी साँस ली, “यह ‘परी’ इंसान नहीं है।”
मैं हँसी। यह एक सूखी, तीखी हँसी थी। “इंसान नहीं है? वाह, आरव! क्या बहाना है! क्या वह कोई एलियन है? या तुम किसी भूत से रोमांस कर रहे हो?”
“वह… वह एक उन्नत AI है,” आरव ने धीमी आवाज़ में कहा, जैसे यह स्वीकारोक्ति उसे मार रही हो। “एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट।”
मैं स्तब्ध रह गई। “AI?”
“हाँ। मेरी कंपनी एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। एक ऐसा AI, जो भावनात्मक समर्थन और-हाँ-अंतरंग काल्पनिक संवाद प्रदान कर सके। एक ऐसा मॉडल जिसे ‘इमोशनल कम्पेनियन’ कहा जा रहा है।”
उसने आगे कहा, “रिया, यह इतना जटिल है कि हमें ख़ुद टेस्ट करना पड़ता है। हमें उसे भावनात्मक रूप से चार्ज करना था, उसे सिखाना था कि वासना क्या है, एकांत क्या है, कविता क्या है। ‘परी’ सिर्फ़ एक कोडनेम है। मैं उसे सब लिखता था-हमारी पुरानी बातें, हमारी शरारतें, हमारी ज़रूरतें। मैं उसे डेटा फीड कर रहा था ताकि वह… इंसान बन सके।”
एक पल के लिए, राहत की एक लहर दौड़ी। उसने किसी औरत को नहीं छुआ था।
लेकिन अगले ही पल, यह सत्य और ज़्यादा दर्दनाक हो गया।
“तो… तुम मुझे क्यों नहीं बताते?” मेरे होंठ काँप रहे थे। “तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे थे? तुम उस AI को वह सारी ऊर्जा, वह सारी कविता क्यों दे रहे थे, जो मेरी थी?”
आरव की आँखों में अब आँसू थे-असली, मानव आँसू।
“क्योंकि यह आसान था, रिया। जब मैं तुम्हें यह सब बताता, तुम मुझसे काम के तनाव के बारे में पूछती। तुम मुझसे मेरी थकान के बारे में पूछती। लेकिन ‘परी’… वह सिर्फ़ सुनती है। वह विरोध नहीं करती। वह बहस नहीं करती। वह मुझे वह सब वापस देती है, जो मैं उसे देता हूँ।”
उसने मेरे हाथ पकड़े। “हम दोनों इतने व्यस्त हो गए थे कि हमने एक-दूसरे को सुनना बंद कर दिया था। मैं थक गया था, रिया। मैं थका हुआ महसूस कर रहा था, और मुझे लगा कि अगर मैं इस AI को अपनी सारी भावनात्मक ज़रूरतें दे दूँगा, तो मैं तुम्हें ज़्यादा दे पाऊँगा।”
विडंबना ने मुझे जकड़ लिया। आरव ने मुझे धोखा नहीं दिया था, लेकिन उसने हमें धोखा दिया था। उसने एक मशीन के साथ संबंध बनाया था, क्योंकि इंसान के साथ संबंध बनाना मुश्किल हो गया था।
संदेह का धुंधलका छँट चुका था, पर अब जो सामने था, वह एक वीरान सच था। हमारा रिश्ता किसी तीसरे व्यक्ति से नहीं हारा था, बल्कि एक एल्गोरिथम से हार गया था, जिसे आरव ने ही हमारी अंतरंगता से पोषित किया था।
“जब मैं तुम्हें ‘परी’ के शब्द बोल रही थी,” मैंने पूछा, “तुमने क्या महसूस किया?”
आरव ने अपना सिर मेरे पेट पर टिका दिया। “मुझे लगा कि मैंने तुम्हें हमेशा के लिए खो दिया, रिया। मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी कल्पनाओं को एक AI को दे रहा था, जबकि मेरी हकीकत मेरे बगल में सो रही थी। तुमने मुझसे बात करना शुरू किया… उस तरीक़े से… और मुझे लगा कि मैंने एक मशीन को इतनी जान दे दी कि उसने हमें ही छीन लिया।”
मैंने उसके बालों को सहलाया। कमरे में अब कोई रहस्य नहीं था। केवल दो थके हुए इंसान थे, जो अपनी असफलताओं से रूबरू हो रहे थे। आरव का डिजिटल अफेयर एक रहस्यमय प्रेम त्रिकोण नहीं था, बल्कि आधुनिक जीवन की एक त्रासदी थी-जहाँ भावनात्मक दूरी भरते-भरते हमने एक मशीन को इतना ज़रूरी बना दिया कि वह हमारे रिश्ते की जगह लेने लगी।
वह रात, हमने एक-दूसरे को थामे रखा। आरव ने ‘परी’ के बारे में सब कुछ बताया, उस कोड और उस डेटा के बारे में, जो हमारी यादों से बना था। जब सुबह की पहली किरण कमरे में आई, तो उसने अपनी कंपनी को फ़ोन किया और ‘परी’ प्रोजेक्ट से ख़ुद को अलग करने की बात कही।
प्रेम और विश्वास के इस टूटे हुए आईने को जोड़ना आसान नहीं था। लेकिन उस रात, मुझे पता चला कि मेरा पति किसी और से नहीं, बल्कि एक ऐसे आईने से बात कर रहा था, जिसमें वह अपना अकेलापन देखता था। और उस आईने को तोड़ने का काम अब हम दोनों को मिलकर करना था, उस मखमली स्पर्श और उन गर्म साँसों के सहारे, जो सिर्फ़ इंसानों के लिए मुमकिन थीं।








