
महाराणा प्रताप और उनके वीर घोड़े चेतक की कहानियां तो आपने बचपन से ही सुनी होंगी। चेतक की लंबी छलांगें और युद्ध के मैदान में उसकी बहादुरी के किस्से तो सभी जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चेतक को युद्ध के मैदान में एक अनोखा हथियार दिया जाता था? जी हां, चेतक के मुंह पर एक हाथी की नकली सूंड बांधी जाती थी। यह एक रणनीतिक चाल थी जिसका मकसद दुश्मनों को धोखा देना था। हाथी की सूंड देखकर दुश्मन घोड़े को हाथी समझकर डर जाते थे और हमला करने से पहले ही पीछे हट जाते थे।
चेतक एक मारवाड़ी घोड़ा था, जो अपनी दुर्लभ नस्ल और खास गुणों के लिए जाना जाता था। मारवाड़ी घोड़े अपनी लंबी गर्दन, बड़े कान और मजबूत शरीर के लिए मशहूर हैं। इनके कान अंदर की ओर मुड़े होते हैं जो इन्हें रेगिस्तानी गर्मी का सामना करने में मदद करते हैं। मारवाड़ी घोड़े अपनी वफादारी, बुद्धि और युद्ध में बहादुरी के लिए सदियों से प्रसिद्ध रहे हैं।
जिन्हें घोड़ों की ज्यादा जानकारी नहीं है, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि घोड़े भी कुत्तों की तरह अलग-अलग नस्लों के होते हैं। सभी घोड़े एक जैसे नहीं दिखते और न ही उनका कार्य समान होता है। दुनिया में 320 से अधिक प्रकार के घोड़े हैं, और हर नस्ल का घोड़ा अलग-अलग कामों के लिए प्रशिक्षित होता है। मारवाड़ी या मलानी घोड़े, जो भारत के मारवाड़ या जोधपुर क्षेत्र से आते हैं, एक दुर्लभ नस्ल हैं। ये अपनी विशिष्टताओं और दुर्लभता के लिए प्रसिद्ध हैं। इनके कान अंदर की ओर मुड़े होते हैं, जो इन्हें रेगिस्तानी गर्मी का सामना करने की अद्वितीय क्षमता प्रदान करते हैं।






