31 साल बाद, वाराणसी जिला कोर्ट ने हिंदुओं को ज्ञानवापी मस्जिद के सील बंद तहखाने में पूजा करने की अनुमति दी है, जिसका मुस्लिम समुदाय ने स्वागत किया। अदालत ने इसे ‘व्यास का तहखाना’ के रूप में जाना जाने वाले क्षेत्र में करने की अनुमति दी है, जो कि नंदी के सामने स्थित है। इस फैसले के बाद, मुस्लिम समुदाय ने सुलह की बातचीत का समर्थन किया और एक दूसरे के साथ मिठाई बांटी।

व्यास जी का तहखाना 31 सालों के बाद खुलने जा रहा है, और कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन को 7 दिनों के भीतर पूजा कराने की व्यवस्था करने का आदेश दिया है। मुस्लिम समुदाय ने इस फैसले का स्वागत किया और राजनीतिक रूप में इसे नहीं बताया, बल्कि सुलहकुल और गंगा जमुना तहजीब की मिसाल मानी।

आगरा के मुस्लिम समुदाय ने विवादों को लेकर यह कहा कि ऐसे मुद्दों में देश का विकास रुका हुआ है और उन्होंने चाहा कि इस पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों को भी यह बताया कि वे सिर्फ वोट बैंक के रूप में नहीं इस्तेमाल होना चाहिए, बल्कि समाज के विकास में योगदान करें। इसे एक नए दृष्टिकोण से देखकर, उन्होंने सुलहकुल और एक एकजुट समाज की महत्वपूर्णता को बताया।

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