एक ख़तरनाक इक़रार: पाँच रातें, पाँच रहस्य
बाहर, दिल्ली की मानसूनी रात अपने पूरे शबाब पर थी। बिजली कड़क रही थी, और हर कड़क के साथ, माया के बंद दरवाज़े के शीशे पर एक भयावह रोशनी पड़कर छन जाती थी। वह अपने स्टडी रूम में बैठी थी, एक पुरानी, मख़मली सोफ़े पर, जिसके सामने लकड़ी की मेज़ पर उसकी नई पांडुलिपि (Manuscript) खुली पड़ी थी: ‘पाँच रातें, पाँच रहस्य’।
कमरे में सिर्फ़ एक लैंप जल रहा था, जिसकी पीली, धीमी रौशनी में अर्जुन का चेहरा किसी प्राचीन मूर्ति जैसा लग रहा था। वह गंभीर था, उसकी गहरी आँखें माया के लिखे हर शब्द को भेदने की कोशिश कर रही थीं। अर्जुन, उसका पूर्व प्रेमी, और अब उसका सबसे कड़ा आलोचक। उनके बीच की दूरी केवल मेज़ की चौड़ाई थी, लेकिन यह दूरी सात साल के विरह, धोखे और एक अनसुलझे रहस्य से बनी थी।
माया ने धीमी आवाज़ में कहा, “तो, अर्जुन। इन ‘पाँच कंपेलिंग रीड्स’ पर तुम्हारा क्या ख़याल है?”
अर्जुन ने पांडुलिपि का शीर्षक पृष्ठ छुआ। “यह महज़ ‘रीड्स’ नहीं हैं, माया। यह तुम हो। तुम्हारी हर साँस, तुम्हारी हर दबी हुई ख़्वाहिश, और तुम्हारा हर ख़ौफ़। तुमने जिस तरह से रहस्य और रोमांस को गूंथा है, वह… ख़तरनाक है।”
उसकी आवाज़ में एक अनजानी सी गर्माहट थी, जो कमरे की नमी को चीरती हुई माया के भीतर उतर गई। सात साल पहले, वे इसी तरह रात-रात भर किताबों और कविता पर बहस करते थे, बहसें जो अक्सर बिस्तर की सिलवटों में समाप्त होती थीं। उनका प्यार सिर्फ़ जुनून नहीं था; यह एक ऐसा रहस्य था जिसे दुनिया की नज़रों से छुपाया गया था।
माया को याद आया वह रात जब उनका रिश्ता ख़त्म हुआ था-उनके दोस्त, वरुण, की आकस्मिक और संदिग्ध मौत। पुलिस ने उसे दुर्घटना बताया था, लेकिन माया और अर्जुन दोनों जानते थे कि वरुण एक गहरे साज़िश का शिकार था। उस रात के बाद, अर्जुन ग़ायब हो गया था, और माया ने अपने दर्द को पन्नों में कैद कर लिया।
“ख़तरनाक तो तुम हमेशा से रहे हो, अर्जुन,” माया ने पलटवार किया, उसकी पलकें थोड़ी झुकी हुई थीं। “मेरी कहानियाँ तो बस उस ख़तरे का आईना हैं।”
अर्जुन ने धीरे से कागज़ों को पलटा। “पहला अध्याय, ‘द शैडो ऑफ़ ए लाइ’… यह एक जासूस की कहानी है जो अपनी ही प्रेमिका के अतीत की जाँच कर रहा है। वह जानता है कि वह झूठ बोल रही है, लेकिन वह झूठ उसे हर रात अपनी बाहों में खींच लेता है।”
उसने सिर उठाया, उसकी आँखें अँधेरे में भी चमक रही थीं। “माया, यह कहानी कितनी वास्तविक है? क्या तुम उस जासूस की पीड़ा महसूस किए बिना, उस इक़रार की शिद्दत महसूस किए बिना लिख सकती थी, जहाँ नायक जानता है कि नायिका का शरीर तो उसका है, लेकिन आत्मा किसी और अपराध में फँसी हुई है?”
माया ने काँपती हुई साँस ली। यह पहला रहस्य था-वरुण की मौत से पहले का उनका आख़िरी झगड़ा। माया ने वरुण से कुछ ऐसा कहा था जो उसे इतना परेशान कर गया कि वह सड़क पर तेज़ गाड़ी चलाने लगा। अर्जुन नहीं जानता था कि वह क्या था।
“साहित्य का काम ही है काल्पनिक झूठ को सुंदर सत्य बनाना,” माया फुसफुसाई।
दूसरा अध्याय: प्रेम का ज़हरीला प्याला
अर्जुन उठा और मेज़ के चारों ओर चलकर माया के नज़दीक आ गया। कमरे में इत्र और काग़ज़ की पुरानी महक में अचानक उसकी पुरुषार्थ की तीव्र गंध घुल गई। उसके चेहरे पर अब एक कठोरता थी, जो माया को वर्षों पहले के उनके बेडरूम की याद दिलाती थी, जब बहसें गर्म होती थीं और कपड़े उतरने लगते थे।
“दूसरा रहस्य,” अर्जुन ने कहा, उसकी आवाज़ अब और गहरी हो गई थी। “’द पॉइज़न ऑफ पैशन’। एक कहानी जिसमें एक विवाहित महिला अपने प्रेमी के साथ एक ऐसा अपराध करती है जिसे छिपाने के लिए उन्हें अपनी पूरी ज़िंदगी एक-दूसरे से झूठ बोलना पड़ता है। तुम लिखती हो, ‘सबसे गहरा प्रेम वह है जो दो लोगों को एक ऐसे दलदल में फँसा दे जहाँ से वे कभी बाहर नहीं निकलना चाहते, क्योंकि दलदल ही उनका घर बन चुका है।’”
अर्जुन ने अपना हाथ माया के गाल के नज़दीक हवा में उठाया, लेकिन उसे छुआ नहीं। यह दूसरा रहस्य था-वरुण की मौत के बाद, जब पुलिस जाँच कर रही थी, माया और अर्जुन ने एक-दूसरे को बचाने के लिए झूठी गवाही दी थी। उन्होंने अपने रिश्ते के सबूत मिटा दिए थे, एक ऐसा झूठ जिसे वे अब तक जी रहे थे।
“यह बात… यह आग कहाँ से आई, माया?” अर्जुन ने फुसफुसाया। “तुमने इस कहानी में नायिका और नायक के बीच के शारीरिक तनाव को इस तरह से वर्णित किया है जैसे हर स्पर्श एक जानलेवा स्वीकारोक्ति हो। क्या तुम जानती हो उस अहसास को, जब तुम किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर को छूते हो जो तुम्हारा सब कुछ है, लेकिन साथ ही तुम्हारा सबसे बड़ा ख़तरा भी?”
बिजली एक बार फिर कड़की, और पल भर के लिए, माया ने देखा कि अर्जुन की आँखों में क्या था: प्यास। सात साल की, बेक़ाबू प्यास।
“मुझे माफ़ कर दो,” माया ने कहा, उसकी आवाज़ मुश्किल से निकली। “यह सब… मुझे यह सब लिखना पड़ा ताकि मैं साँस ले सकूँ। तुम चले गए थे, अर्जुन। तुमने मुझे उस झूठ के साथ अकेला छोड़ दिया था।”
“मैंने तुम्हें छोड़ा नहीं था!” अर्जुन ने अपनी आवाज़ को दबाया। “मैंने तुम्हें बचाया था! उस दलदल से दूर रहने की कोशिश की थी। और अब तुम मुझे यह पांडुलिपि भेजती हो, मेरे सामने एक-एक करके हमारे सभी पापों को खोलकर रखती हो, और उम्मीद करती हो कि मैं केवल एक संपादक बन कर रहूँ?”
वह अब उसके बहुत क़रीब था। उसके होंठ माया के कान के पास थे। “तुमने लिखा, ‘जब होंठ मिलते हैं, तो केवल इक़रार नहीं होता; वे अतीत के घावों को एक-दूसरे के मुँह में थूकते हैं।’ क्या तुम चाहती हो कि हम आज रात फिर से इक़रार करें, माया?”
उसकी साँसों की गर्म हवा माया की गर्दन को सहला रही थी, और माया का शरीर, जो वर्षों से सुन्न पड़ चुका था, अब उस जाने-पहचाने जुनून की आग में जल उठा। उसने धीरे से अपना सिर पीछे झुकाया, अपनी गर्दन को उसके लिए बेपर्दा कर दिया।
तीसरा और चौथा रहस्य: शरीर की स्वीकारोक्ति
अर्जुन का हाथ उसकी पीठ पर कस गया। यह स्पर्श केवल प्रेम का नहीं था; यह कब्ज़े का था, जैसे वह उस झूठ को फिर से अपना बनाना चाहता हो जो उन्हें एक साथ बाँधता था।
“तीसरा अध्याय: ‘द आर्ट ऑफ़ एस्केप’,” अर्जुन ने लगभग हाँफते हुए कहा। “यह कहानी एक ऐसे कलाकार की है जो अपनी प्रेमिका के नग्न चित्रों में एक गुप्त कोड छिपाता है। कोड जो बताता है कि वे दोनों हत्यारे हैं।”
यह तीसरा रहस्य था-वरुण की मौत के बाद, माया ने अपने अंदर के अपराधबोध को पेंटिंग में छुपाना शुरू कर दिया था, हर स्ट्रोक में वरुण की आख़िरी चीख़ को दर्ज करती थी। अर्जुन ने हमेशा उन पेंटिंग्स को ‘डिप्रैसिव’ कहा था, लेकिन उसने कभी कोड को नहीं समझा।
माया ने धीरे से अर्जुन के कोट के बटन खोले। उसके हाथ काँप रहे थे। “और चौथा, अर्जुन? चौथा रहस्य क्या है?”
अर्जुन की उंगलियाँ माया के मुलायम स्वेटर के नीचे फिसल गईं, सीधे उसकी कमर की त्वचा पर। वह गर्म थी, बिजली से भरी हुई।
“चौथा,” अर्जुन ने फुसफुसाया, उसके होंठ माया के होंठों को हल्के से छू रहे थे। “चौथा है ‘द एमिटी ऑफ़ डेंजर’। यह एक ऐसी नायिका की कहानी है जो एक पुलिस अफ़सर के साथ सोती है, सिर्फ़ इसलिए ताकि वह अपनी और अपने प्रेमी की जाँच को भटका सके। वह न केवल शारीरिक रूप से उसका इस्तेमाल करती है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी, यह जानते हुए कि हर अंतरंग पल उन्हें आज़ादी के क़रीब ले जा रहा है।”
माया की आँखें बंद हो गईं। यह चौथा रहस्य था-अर्जुन के जाने के बाद, माया ने एक जासूस से रिश्ता बनाया था, जो वरुण के केस को बंद करने वाला था। यह एक गंदा, इस्तेमाल भरा रिश्ता था, जिसे माया ने अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा धोखा माना था। उसने उस जासूस के साथ सब कुछ किया था, सिर्फ़ इसलिए कि वह अर्जुन को बचा सके।
अर्जुन का चुंबन शुरू हुआ-गहरा, ज़हरीला और अधिकारपूर्ण। यह सात साल का जमा हुआ दर्द था जो अब उनके मुँह में उतर रहा था। उनकी साँसों की गति तेज़ी से बढ़ी। बारिश की आवाज़ अब सिर्फ़ एक पृष्ठभूमि संगीत थी, क्योंकि उनके शरीर की भाषा ज़्यादा तेज़ थी।
माया ने उसके बालों को खींचते हुए उसे और क़रीब किया। उसकी बाहों में, वह फिर से वही पुरानी माया थी-ख़तरनाक, बेक़ाबू और पूरी तरह से उसकी। अर्जुन ने उसे सोफ़े पर धकेल दिया, और पांडुलिपि के पन्ने हवा में बिखरे, जैसे अतीत के टुकड़े हों।
“तुमने मुझे क्यों छोड़ा, अर्जुन?” उसने हाँफते हुए पूछा, जबकि अर्जुन का वज़न उसे ज़मीन से चिपका रहा था।
“क्योंकि तुम आग हो, माया,” उसने अपनी आवाज़ में पीड़ा के साथ कहा। “और मैं तब तुम्हें जला नहीं सकता था।”
उनके बीच की दूरी समाप्त हो गई। कपड़े, जो अब उनके जुनून में बाधा थे, ज़मीन पर गिराए गए। उस तूफ़ानी रात में, दो प्रेमी नहीं, बल्कि दो अपराधी फिर से एक हुए, अपनी ग़लतियों को एक-दूसरे के शरीर में खोजने की कोशिश कर रहे थे। हर स्पर्श एक सवाल था, हर किस एक माफ़ी थी। अर्जुन का स्पर्श मांगलिक था, वह हर उस जगह को सहला रहा था जहाँ माया ने अकेलेपन में दर्द सहा था। उसने माया के हर वक्र को ऐसे छुआ जैसे वह कोई पवित्र चीज़ हो, जिसे वह बचाने की कोशिश कर रहा हो, भले ही वह उसे नष्ट कर दे।
पाँचवाँ रहस्य: द फाइनल कंफ़ेशन
घंटे बीत गए। तूफ़ान थोड़ा शांत हुआ था, लेकिन कमरे का माहौल अब भी गर्म और तीव्र था। वे दोनों सोफ़े के पास ज़मीन पर, एक-दूसरे से चिपके पड़े थे। उनकी साँसें अभी भी अनियमित थीं, और शरीर पसीने से भीगा था।
अर्जुन ने बिखरे हुए कागज़ों में से आख़िरी अध्याय उठाया। ‘द फ़िफ़्थ रीड: अनमास्क्ड’।
“यह क्या है, माया?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ अब थकी हुई लेकिन शांत थी। “यह पाँचवाँ रहस्य, जो तुमने इतने सालों से छुपा रखा है।”
इस आख़िरी कहानी में, नायिका अपने प्रेमी को बताती है कि वरुण की मौत के लिए ज़िम्मेदार कौन था। यह कोई साज़िश या बाहर का दुश्मन नहीं था। यह उनके बीच का कोई व्यक्ति था।
अर्जुन ने पढ़ना शुरू किया, उसके चेहरे की मांसपेशियाँ कसने लगीं। माया ने अपना सिर उसके सीने पर रखा हुआ था, और वह उसकी धड़कनें सुन सकती थी, जो तेज़ी से सामान्य से असामान्य हो रही थीं।
कहानी में नायिका बताती है कि वरुण की मौत दुर्घटना नहीं थी। वरुण को पता चल गया था कि नायिका और नायक एक साथ हैं। वह इतना नाराज़ हुआ था कि उसने नायिका को ब्लैकमेल करने की धमकी दी।
और फिर, वह रात। नायिका ने वरुण को रोकने की कोशिश की थी। उसने उसकी कार की चाबी छीनने की कोशिश की, एक हाथापाई हुई। और फिर, एक भयानक झटका। वरुण को धक्का लगा और वह भाग गया, अपनी कार में ग़ुस्से में बैठा।
लेकिन धक्का देने वाली… वह नायिका नहीं थी।
अर्जुन ने पांडुलिपि अपने हाथ में जकड़ ली। “तुम लिखती हो, ‘उस रात, बारिश में, मैंने देखा कि मेरे प्रेमी ने, मेरे सामने, मेरे सबसे अच्छे दोस्त को धक्का दिया था। यह जानलेवा नहीं था, लेकिन यह इतना अचानक था कि वरुण ने अपना नियंत्रण खो दिया।’”
अर्जुन का शरीर अब पत्थर जैसा कठोर था। उसने माया को अपने से दूर धकेल दिया, उसकी आँखें ख़ौफ़ और अविश्वसनीयता से भरी थीं।
“तुम… तुम कहना चाहती हो…” अर्जुन का गला सूख गया।
“हाँ, अर्जुन,” माया ने स्वीकार किया, आँसू अब उसके गालों पर थे। “वरुण की कार सड़क से तभी फिसली जब तुमने ग़ुस्से में उसे धक्का दिया था। तुमने उसे मारना नहीं चाहा था, लेकिन वह तुम्हारी वजह से मरा। और जब तुम भाग गए, डर के मारे, तो मैंने पुलिस को बताया कि हम उस रात कभी मिले ही नहीं।”
सात साल। सात साल तक वह इस झूठ को ढोती रही थी, इस अपराध को अपने प्रेम के आवरण में छिपाती रही थी। अर्जुन, उसका प्रेमी, उसका रक्षक, वही उसका सबसे बड़ा अपराधी था। और उसने इन ‘पाँच कंपेलिंग रीड्स’ में, दुनिया को बताने के लिए, अपनी ज़िंदगी के सबसे काले रहस्यों को पन्नों में डाल दिया था।
“तुमने मुझे सात साल तक यह मानने दिया कि मैं बस एक ग़लत प्रेमी हूँ,” अर्जुन चिल्लाया, उसकी आवाज़ में गहरा विश्वासघात था। “तुमने इन कहानियों को सिर्फ़ हमारी प्रेम कहानी बताने के लिए नहीं लिखा। तुमने इन्हें इसलिए लिखा ताकि तुम अंत में मुझे यह स्वीकारोक्ति थमा सको!”
माया उठी, नग्न और कमज़ोर, लेकिन उसकी आँखों में अब एक शांत दृढ़ता थी।
“हाँ,” उसने फुसफुसाया। “आज रात हम फिर से एक हुए। आज रात हमने उन सभी चार रहस्यों को जिया जो हमें बांधते थे। लेकिन यह पाँचवाँ रहस्य, अर्जुन, यह वह ताला है जो हमें हमेशा के लिए बाँध देगा। अब जब तुम यह जान चुके हो, तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते। क्योंकि अब, तुम न केवल मेरे प्रेमी हो, बल्कि मेरे अपराध में मेरे पूर्ण सहभागी भी हो। हमारी प्रेम कहानी एक ख़ूनी क़िस्सा है, अर्जुन। और तुम अब इसके सह-लेखक हो।”
अर्जुन ने उस पांडुलिपि को ज़ोर से ज़मीन पर फेंका। वह कमरे के कोने में, दीवार के सहारे बैठ गया, अपने सिर को हाथों में दबाए। उसने माया को देखा-वह ख़ूबसूरत, ख़तरनाक और पूरी तरह से उसकी।
बाहर की बारिश रुक चुकी थी। लेकिन उनके भीतर, अपराध और जुनून का तूफ़ान अभी शुरू ही हुआ था। माया ने धीरे से, उस ज़हरीले इक़रार की गवाह, बिखरी हुई पांडुलिपि में से एक पन्ना उठाया। वह जानती थी कि अर्जुन न तो उसे छोड़ पाएगा, न ही उसे सज़ा दे पाएगा। वे हमेशा के लिए एक-दूसरे के रहस्य बन चुके थे।
और यही, माया के लिए, प्रेम की सबसे गहरी और सबसे भयानक परिभाषा थी।








